खूंटी में गेंदा फूल की खेती से बदली गांवों की तस्वीर, 1500 परिवार जुड़ेंगे

खूंटी : झारखंड के खूंटी जिले के गांवों में इन दिनों खेत के खेत केसरिया गेंदा फूलों से भर गए हैं। दूर से देखने पर ऐसा लगता है, जैसे खेतों में केसरिया चादर बिछ गई हो। इन फूलों से सिर्फ खेतों की खूबसूरती ही नहीं

गेंदा फूल

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खूंटी : झारखंड के खूंटी जिले के गांवों में इन दिनों खेत के खेत केसरिया गेंदा फूलों से भर गए हैं। दूर से देखने पर ऐसा लगता है, जैसे खेतों में केसरिया चादर बिछ गई हो। इन फूलों से सिर्फ खेतों की खूबसूरती ही नहीं बढ़ रही, बल्कि गांव के लोगों की जिंदगी में भी बदलाव आ रहा है। कभी रोजगार नहीं मिलने पर दूसरे राज्यों में काम की तलाश में जाने वाले ग्रामीण अब अपने गांव में ही गेंदा फूल उगाकर कमाई कर रहे हैं। खास बात यह है कि खूंटी के खेतों में उगे गेंदा फूल अब सिर्फ जिले के बाजारों तक नहीं पहुंच रहे हैं। किसान रांची, लोहरदगा, गुमला समेत झारखंड के कई दूसरे जिलों में भी फूल भेज रहे हैं। इससे उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए बड़ा बाजार मिल रहा है।

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दशहरा के बाद अब दीपावली और छठ की तैयारी शुरू हो गई है। ऐसे में गेंदा फूलों की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। घर हो, मंदिर हो, पूजा-पाठ हो या कोई सार्वजनिक कार्यक्रम, सजावट के लिए गेंदा फूलों की खूब जरूरत पड़ती है। त्योहारों के इस मौसम में बढ़ती मांग ने खूंटी के किसानों को अच्छी कमाई की उम्मीद दी है। सबसे अच्छी बात यह है कि किसान कम जमीन और थोड़े संसाधनों में भी इस खेती से अतिरिक्त पैसा कमा रहे हैं।

अफीम की खेती छोड़ फूल उगाने लगे किसान, पलायन पर भी लगेगी रोक

खूंटी में गेंदा फूल की खेती को बढ़ावा देने की शुरुआत करीब 13 साल पहले हुई थी। इसके पीछे मकसद साफ था। आदिवासी बहुल गांवों में अफीम की अवैध खेती पर लोगों की निर्भरता कम हो और रोजगार नहीं मिलने के कारण गांव छोड़कर बाहर जाने वाले लोगों को अपने ही इलाके में काम मिल सके। इसी सोच के साथ ‘प्रदान’ संस्था ने ग्रामीणों को गेंदा फूल की खेती करने के लिए तैयार किया। संस्था ने किसानों को समझाया कि वे अपनी जमीन पर फूल उगाकर भी अच्छी आमदनी कर सकते हैं। धीरे-धीरे गांव के लोगों ने इस खेती में दिलचस्पी दिखानी शुरू कर दी।

इस काम में अब ‘प्रदान’ के साथ झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) और दूसरी संस्थाएं भी मदद कर रही हैं। खूंटी महिला कृषि बागवानी स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड के जरिए दूर-दराज के गांवों के किसानों को भी इस खेती से जोड़ा जा रहा है। यहां की मिट्टी और मौसम गेंदा फूल की खेती के अनुकूल हैं। यही वजह है कि अब ज्यादा से ज्यादा किसान इस खेती को अपना रहे हैं।

400 एकड़ में लगे 15 लाख पौधे, 1500 किसान परिवारों को जोड़ने का लक्ष्य

इस साल खूंटी जिले में करीब 1500 किसान परिवारों को गेंदा फूल की खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए जिले में लगभग 400 एकड़ जमीन पर खेती की गई है। इन खेतों में करीब 15 लाख गेंदा के पौधे लगाए गए हैं। अब पौधों में फूल खिलने लगे हैं। किसान फूल तोड़ने, उनकी माला बनाने और बाजार तक पहुंचाने की तैयारी में जुटे हैं। खूंटी से रांची, लोहरदगा, गुमला समेत दूसरे जिलों में फूल भेजे जा रहे हैं। इससे किसानों को जिले से बाहर भी अपनी उपज बेचने का मौका मिल रहा है। किसानों के लिए एक और अच्छी बात यह है कि गेंदा फूल की मांग सालभर अलग-अलग मौकों पर बनी रहती है। हालांकि, त्योहारों और शादी-विवाह के मौसम में इसकी मांग काफी बढ़ जाती है। ऐसे समय में किसानों को फूल बेचकर अच्छी कमाई करने का मौका मिलता है।

सिर्फ 10 डिसमिल जमीन में 25 से 30 हजार रुपये तक कमाई की उम्मीद

गेंदा फूल की खेती के लिए किसानों को बहुत ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं पड़ती। छोटे और सीमांत किसान भी थोड़ी जमीन में इसकी खेती करके अच्छी आमदनी की उम्मीद कर सकते हैं। खूंटी-तोरपा रोड के किनारे फूल और फूलमालाएं बेचने वाले किसान जोनशन भेंगरा, सुनील भेंगरा और प्रोमिला तिरु बताते हैं कि कम जमीन में भी गेंदा फूल की खेती फायदेमंद हो सकती है। उनका कहना है कि 10 डिसमिल जमीन में फूल उगाने से करीब 25 से 30 हजार रुपये तक की कमाई हो सकती है।

हालांकि, किसान को कितनी कमाई होगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि फूलों का उत्पादन कितना हुआ, मौसम कैसा रहा, खेती में कितना खर्च आया और बाजार में फूलों का क्या भाव मिला। किसानों का कहना है कि दुर्गापूजा, दीपावली, छठ, शादी-विवाह और दूसरे धार्मिक व सामाजिक कार्यक्रमों में गेंदा फूलों की मांग काफी बढ़ जाती है। ऐसे मौकों पर फूलों के अच्छे दाम मिलने की उम्मीद रहती है। फूल बेचकर मिलने वाले पैसे से छोटे किसान अपने घर का खर्च और दूसरी जरूरतें भी पूरी कर सकते हैं।

महिलाओं को भी मिल रहा काम, घर बैठे बढ़ रही आमदनी

खूंटी में गेंदा फूल की खेती से सिर्फ किसानों को ही फायदा नहीं हो रहा, बल्कि उनके परिवार के दूसरे सदस्यों को भी काम मिल रहा है। खासकर महिलाएं इस खेती में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। पौधों की देखभाल से लेकर फूल तोड़ने, छांटने, माला बनाने और बाजार में बेचने तक के काम में परिवार के लोग हाथ बंटा रहे हैं। इससे गांव में ही लोगों को काम मिल रहा है। महिलाओं को भी कमाई का मौका मिल रहा है और परिवार की आमदनी बढ़ाने में उनकी भागीदारी मजबूत हो रही है।

खूंटी में गेंदा फूल की खेती को बढ़ावा देने वाली संस्था ‘प्रदान’ के स्टेट हेड प्रेम शंकर का कहना है कि इस पहल से गांवों में खेती को लेकर लोगों की सोच बदली है। जिन इलाकों में पहले अफीम की अवैध खेती और रोजगार के लिए पलायन बड़ी समस्या थी, वहां अब किसान अपनी जमीन पर फूल उगाकर आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इस काम से महिलाओं और ग्रामीण परिवारों को भी आजीविका का नया सहारा मिल रहा है।

फूलों की सही कीमत मिले, इसके लिए बाजार और गाड़ी की व्यवस्था जरूरी

प्रेम शंकर के मुताबिक, गेंदा फूल की खेती को लंबे समय तक फायदे का सौदा बनाए रखने के लिए सिर्फ उत्पादन बढ़ाना काफी नहीं है। किसानों को उनकी उपज बेचने के लिए सही समय पर बाजार मिलना भी जरूरी है। इसके साथ ही फूलों का उचित दाम मिले और उन्हें सुरक्षित तरीके से बाजार तक पहुंचाने के लिए परिवहन की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए। दरअसल, गेंदा फूल ज्यादा समय तक ताजा नहीं रहता। अगर समय पर बिक्री नहीं हुई या फूलों को बाजार तक पहुंचाने में देर हुई, तो किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उनका कहना है कि अगर किसानों को संगठित बाजार, सही कीमत और बेहतर परिवहन की सुविधा मिलती है, तो खूंटी के गेंदा फूल झारखंड के दूसरे जिलों में भी अपनी पहचान बना सकते हैं। इससे आने वाले समय में ज्यादा किसान इस खेती से जुड़ सकेंगे और खेती का रकबा भी बढ़ सकता है। कर्रा प्रखंड के विकासशील किसान दिलीप शर्मा का कहना है कि खूंटी के खेतों में खिले केसरिया गेंदा फूल सिर्फ त्योहारों में सजावट के काम नहीं आ रहे हैं। ये गांव के किसानों की मेहनत और आत्मनिर्भर बनने की कोशिश को भी दिखा रहे हैं। दीपावली और छठ में घरों की रौनक बढ़ाने वाले यही फूल सैकड़ों ग्रामीण परिवारों के जीवन में खुशहाली की उम्मीद जगा रहे हैं।

कुल मिलाकर, खूंटी में गेंदा फूल की खेती अब सिर्फ खेती-किसानी तक सीमित नहीं रह गई है। इससे गांव के लोगों को रोजगार मिल रहा है, महिलाओं को कमाई का मौका मिल रहा है और किसानों को अपने ही गांव में रहकर आमदनी करने का रास्ता मिल रहा है। खेतों में खिले ये केसरिया फूल बता रहे हैं कि सही मार्गदर्शन और बाजार की सुविधा मिले, तो गांवों में भी रोजगार और कमाई के नए रास्ते खुल सकते हैं।

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