रांची : झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने चुनाव आयोग के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि द इंडियन एक्सप्रेस की जांच में सामने आए तथ्यों ने आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। पांच सप्ताह के भीतर आयोग द्वारा अपने ही फैसलों और व्यवस्थाओं में किए गए बदलावों से स्पष्ट है कि उसे अपनी कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता महसूस हुई है। आलोक कुमार दूबे ने कहा कि बैठकों के एजेंडे और मिनट्स जारी करने, अधिकारियों की विदेश यात्राओं की अनुमति, ईसीआईनेट के ऑडिट, मतदाता सूची में सुधार और चुनावी अधिकारियों की शक्तियों जैसे मुद्दों पर आयोग का पीछे हटना बताता है कि पहले उठाई गई आपत्तियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था।
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मतदाता सूची में गड़बड़ी पर सवाल
उन्होंने गोवा में 97 मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल करने की प्रक्रिया और पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े मामलों पर आयोग के बदलते रुख पर सवाल खड़े किए। दूबे ने मांग की कि चुनाव आयोग स्पष्ट करे कि पहले इन मतदाताओं के नाम हटाने की नौबत क्यों आई और अब उन्हें शामिल करने के लिए नए निर्देश क्यों जारी करने पड़े। आलोक कुमार दूबे ने कहा कि आयोग की जिम्मेदारी केवल चुनाव कराना नहीं, बल्कि प्रत्येक मतदाता के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना भी है। मतदाता सूची में गड़बड़ी लोकतंत्र की बुनियाद को कमजोर करती है। यदि किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया है, तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
कांग्रेस ने मांगी पारदर्शिता
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता को लेकर देशभर में सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस लगातार मतदाता सूची में पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता की मांग करती रही है। आयोग के हालिया बदलावों से इन सवालों को और बल मिला है। आलोक कुमार दूबे ने कहा कि जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जवाब चाहती है। चुनाव आयोग को बताना होगा कि कथित गड़बड़ियों के लिए कौन जिम्मेदार है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि लोकतंत्र में मतदाता सर्वोपरि है और कांग्रेस इस मुद्दे पर जनता की आवाज बुलंद करती रहेगी।



