नई दिल्ली/रांची : झारखंड में DGP की नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद पर आज यानी मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। चर्चित प्रकाश सिंह मामले से जुड़े इस मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार को अगली सुनवाई से पहले अपना काउंटर एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी। झारखंड सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने कोर्ट में अपना पक्ष रखा।
Read More : धनबाद में गलत लाइन पर गई गोमो-आसनसोल पैसेंजर, सुरक्षा पर उठे सवाल
DGP नियुक्ति नियमों पर अदालत के सवाल
पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार द्वारा पुलिस अधिनियम, 1861 के तहत बनाए गए चयन और नियुक्ति नियम, 2025 पर गंभीर सवाल उठाए थे। संशोधित नियमों के तहत ऐसे अधिकारियों को भी DGP पद के लिए पात्र माना गया है, जिनकी सेवानिवृत्ति में छह महीने से कम समय बचा है। इसके लिए पूर्वव्यापी सेवा का लाभ दिए जाने का प्रावधान किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इन प्रावधानों को प्रकाश सिंह मामले में तय दिशानिर्देशों के विपरीत माना है।
एमिकस क्यूरी से नियमों की वैधता पर सहायता
मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता और एमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन से नियम की वैधता पर सहायता करने का अनुरोध किया है। उन्हें DGP नियुक्ति के लिए अन्य राज्यों में बनाए गए समान कानूनों और नियमों की समीक्षा करने को भी कहा गया है। अदालत ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को इस कार्य में एमिकस क्यूरी की सहायता करने का निर्देश दिया है। यूपीएससी की ओर से लिखित दलीलें भी दाखिल की जा चुकी हैं।



