रांची: पांच फुट की विशाल थाली में सजी झारखंड की राजकीय मछली देसी मांगुर, दाल, भात और सलाद। दीवारों पर सोहराय कला से प्रेरित त्रि-आयामी (3D) मछलियाँ और बच्चों के लिए मछली से जुड़ा एक रोचक खेल। मोरहाबादी मैदान में आयोजित जेसोवा दिवाली मेला में मत्स्य निदेशालय, झारखंड सरकार का स्टॉल इस वर्ष पोषण, ग्रामीण आजीविका और राज्य की सांस्कृतिक विरासत को एक अनूठे अंदाज में प्रस्तुत कर रहा है।
पांच फुट की पोषण थाली स्टॉल का मुख्य आकर्षण
झारखंड आईएएस ऑफिसर्स वाइव्स एसोसिएशन (JIASOWA) द्वारा 29 अक्टूबर से 3 नवंबर 2026 तक आयोजित इस मेले में विभाग की थीम है—”इस दिवाली, हर थाली हो पोषण वाली।” पांच फुट की पोषण थाली स्टॉल का मुख्य आकर्षण है। इसके माध्यम से मछली के पोषण संबंधी महत्व को रेखांकित किया गया है। मछली प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन और खनिजों का अच्छा स्रोत है और इसका सेवन करने वाले परिवार इसे संतुलित आहार का हिस्सा बना सकते हैं।
मत्स्य सहयोग समितियों के लिए आजीविका के नए अवसर खोल सकती
पोषण के साथ विभाग ने मत्स्य पालन को ग्रामीण आजीविका के अवसर के रूप में भी प्रस्तुत किया है। नदियों, तालाबों और जलाशयों से समृद्ध झारखंड में मत्स्य पालन किसानों, महिला समूहों और स्थानीय मछुआरा समुदायों के लिए अतिरिक्त आय का माध्यम बन सकता है। स्टॉल पर केज कल्चर (Cage Culture) की जानकारी दी जा रही है, जिसमें बड़े जलाशयों में तैरते जालीनुमा पिंजरों के भीतर मछलियों का पालन किया जाता है। यह तकनीक विशेष रूप से जलाशय क्षेत्रों के मछुआरों, विस्थापित परिवारों और मत्स्य सहयोग समितियों के लिए आजीविका के नए अवसर खोल सकती है। विभागीय योजनाओं, प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग की जानकारी भी इच्छुक आगंतुकों को दी जा रही है।
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स्टॉल की एक खास विशेषता झारखंड की पारंपरिक सोहराय कला का अभिनव प्रयोग है। सदियों से घरों की दीवारों पर चित्रित होती रही इस लोककला के पारंपरिक मोटिफ़ को 3D मछलियों के रूप में ढालकर प्रदर्शित किया गया है। कुछ मछलियों को मछुआरों के जाल में फंसा हुआ दर्शाया गया है, जो जल, प्रकृति, कला और आजीविका के आपसी संबंध को दर्शाता है। GI टैग प्राप्त सोहराय-कोहबर चित्रकला के इस रचनात्मक प्रयोग के माध्यम से राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मत्स्य पालन से जोड़ा गया है।
आगंतुकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए स्टॉल पर कई रोचक गतिविधियां भी रखी गई हैं। घूमने वाले क्यूब के माध्यम से विभागीय योजनाओं की जानकारी दी जा रही है, जिन्हें घुमाकर लोग अपने लिए उपयोगी योजनाओं के बारे में जान सकते हैं। बच्चों के लिए ‘चकरी घुमाओ, मछली फँसाओ!’ खेल आकर्षण का केंद्र है। चकरी जिस मछली पर रुकती है, उससे संबंधित जानकारी का कार्ड बच्चे अपने साथ ले जा सकते हैं। इसके अलावा, राज्य के मानचित्र और सूचना-पटों के जरिए विभिन्न जिलों की मत्स्य गतिविधियों तथा महाझींगा पालन, मोती पालन और बायोफ्लॉक जैसी आधुनिक तकनीकों को प्रदर्शित किया गया है।
स्टॉल की थीम ‘पोषण थाली
इस पहल पर अमरेंद्र कुमार , निदेशक, झारखण्ड,रांची एवं मुख्य अनुदेशक , मत्स्य किसान प्रशिक्षण केंद्र, रांची ने कहा, “इस वर्ष हमारे स्टॉल की थीम ‘पोषण थाली’ है। हमारा प्रयास है कि पोषण का संदेश हर घर तक पहुँचे। झारखंड की समृद्ध जल-संपदा मछली पालन के माध्यम से गाँवों में रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर पैदा कर सकती है। साथ ही, मछली का सेवन करने वाले परिवारों के लिए यह पोषण का अच्छा स्रोत है। हम चाहते हैं कि लोग इन दोनों संभावनाओं को पहचानें। विभाग का प्रयास है कि सरकारी योजनाओं और तकनीकी जानकारियों को सरल एवं आकर्षक तरीके से लोगों तक पहुँचाया जाए, ताकि वे इन्हें समझ सकें और इनका लाभ उठा सकें। जेसोवा दिवाली मेला इस दिशा में एक अच्छा अवसर है। हम सभी आगंतुकों का अपने स्टॉल पर स्वागत करते हैं।
मत्स्य निदेशालय का यह स्टॉल झारखंड की जल-संपदा को पोषण और ग्रामीण समृद्धि से जोड़ने के साथ-साथ राज्य की पारंपरिक कला और मत्स्य पालक समुदायों को एक साझा मंच पर लाने का प्रयास है।



