रांची : झारखंड में अवैध शराब के कारोबार पर लगाम लगाने के लिये सरकार अब आधुनिक तकनीक का सहारा लेने की तैयारी में है। शराब माफिया की गतिविधियों पर जमीन के साथ आसमान से भी नजर रखी जायेगी। इसके लिये राज्य का उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल की योजना बना रहा है।
राज्य में अवैध शराब के कारोबार को पूरी तरह समाप्त करना सरकार का लक्ष्य
इस पहल का उद्देश्य अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर प्रभावी तरीके से रोक लगाना है। ड्रोन तकनीक की उपयोगिता परखने के लिये विभाग ने कंपनियों को प्रदर्शन के लिये आमंत्रित किया है। इस दौरान यह आकलन किया जायेगा कि ड्रोन के जरिये संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी कितनी प्रभावी ढंग से की जा सकती है। उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने मीडिया से कहा कि राज्य में अवैध शराब के कारोबार को पूरी तरह समाप्त करना सरकार का लक्ष्य है। इसके लिये आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में पहल की जा रही है। ड्रोन से निगरानी की व्यवस्था अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाने में मददगार साबित हो सकती
जंगलों और दुर्गम इलाकों में भी होगी निगरानी
झारखंड के कई इलाकों में जंगलों, नदी किनारे और दुर्गम स्थानों पर अवैध शराब बनाने की शिकायतें मिलती रही हैं। ऐसे स्थानों तक पहुंचना उत्पाद विभाग की टीम के लिये कई बार चुनौतीपूर्ण होता है। ड्रोन तकनीक के जरिये इन क्षेत्रों की निगरानी कर संदिग्ध ठिकानों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
इससे विभाग को छापेमारी की रणनीति बनाने और अवैध शराब के निर्माण व भंडारण से जुड़े स्थानों तक पहुंचने में सहूलियत होगी। अवैध शराब का कारोबार सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचाने के साथ लोगों की सेहत और सुरक्षा के लिये भी खतरा बन सकता है। मिलावटी या जहरीली शराब के सेवन से जानलेवा घटनाएं होने का जोखिम रहता है।
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