हड़िया पीने पर विवाद में बेटे की हत्या करने वाले 88 वर्षीय बुजुर्ग को हाईकोर्ट से राहत, तुरंत रिहा करने का आदेश

रांची: अपने 20 वर्षीय बेटे की चाकू घोंपकर हत्या करने के आरोपी 88 वर्षीय पिता को हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है।न्यायमूर्ति आनंद सेन और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने निचली अदालत द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा में संशोधन करते हुए मामले

हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट

अपनी भाषा में पढ़ें

रांची: अपने 20 वर्षीय बेटे की चाकू घोंपकर हत्या करने के आरोपी 88 वर्षीय पिता को हाईकोर्ट ने  बड़ी राहत दी है।न्यायमूर्ति आनंद सेन और न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने निचली अदालत द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा में संशोधन करते हुए मामले को हत्या की धारा 302 के बजाय गैर-इरादतन हत्या की धारा 304 भाग-II माना है। पीठ ने बुजुर्ग की अत्यधिक उम्र और उनके द्वारा काटी गई करीब 13 साल की जेल अवधि को देखते हुए सजा को काटी गई अवधि में तब्दील कर उन्हें तत्काल जेल से रिहा करने का आदेश दिया है।

also read :रांची प्रेस क्लब में 21 नवंबर को राष्ट्रीय पत्रकारिता संगोष्ठी, कई दिग्गज होंगे शामिल

अपीलकर्ता गोमा गोप की ओर से नियुक्त एमिकस क्यूरी अधिवक्ता अल्पना वर्मा ने पीठ के समक्ष दलील दी कि अपीलकर्ता को केवल अनुमानों और शंकाओं के आधार पर झूठा फंसाया गया है। उन्होंने यह भी दलील रखी कि अपीलकर्ता बिना किसी ठोस आधार के लंबे समय से जेल में बंद है, इसलिए निचली अदालत के दोषसिद्धि और सजा के आदेश को निरस्त कर उसे रिहा किया जाए।

राज्य की ओर से उपस्थित अपर लोक अभियोजक (तरुण कुमार ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि ट्रायल कोर्ट का फैसला उचित था क्योंकि आरोपी ने अपने बेटे की चाकू मारकर हत्या की थी और घटनास्थल से खून से सनी मिट्टी और चाकू भी बरामद किया गया था।

खंडपीठ ने गवाहों और डॉक्टर की मेडिकल रिपोर्ट का विश्लेषण करने के बाद कहा कि मृतक पर चाकू से सिर्फ एक ही वार किया गया था। घटना नशे की हालत में अचानक हुए विवाद और आवेश के क्षण में हुई थी, जिसमें पहले से जान लेने का कोई इरादा साबित नहीं होता।

also read :उपायुक्त की अध्यक्षता में हुई राजस्व से संबंधित महत्वपूर्ण बैठक,राजस्व कर्मियों को कड़ी फटकार

अदालत ने माना कि यह मामला आईपीसी की धारा 300 के अपवाद-4 (अचानक विवाद और गुस्से में बिना क्रूरता के किया गया कृत्य) के तहत आता है। इसलिए इसे हत्या की धारा 302 न मानकर गैर-इरादतन हत्या धारा 304 Part-II माना गया. खंड फ बात पर गौर किया कि जब सीआरपीसी की धारा 313 के तहत अपील करता का बयान दर्ज किया गया था तब उसकी उम्र करीब 80 साल थी। अब उसकी उम्र लगभग 88 वर्ष हो चुकी है। अभी भी जेल में हैं।  वह लगभग 13 वर्षों से आपराधिक कार्यवाही का सामना कर रहा है। ऐसे में काटी गई अवधि को ही सजा मानते हुए उसे किसी अन्य मामले में वांछित न होने पर तुरंत रिहा करने का आदेश दिया गया।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram
संबंधित खबरें.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

अभी-अभी.