रांची : रांची के मांडर प्रखंड स्थित बुढ़ाखुखरा में सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने 5000 मीट्रिक टन क्षमता वाले आधुनिक शीतगृह का उद्घाटन किया। करीब ₹15.01 करोड़ की लागत से बने इस शीतगृह के साथ 100 किलोवाट क्षमता वाले सौर ऊर्जा संयंत्र की भी शुरुआत हुई। कार्यक्रम में किसानों की उपज के परिवहन और विपणन को मजबूत करने के लिए सहकारी समितियों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को ₹1 करोड़ 4 लाख 50 हजार की परिसंपत्तियां भी दी गईं।
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₹15.01 करोड़ की लागत से बना है आधुनिक शीतगृह
बुढ़ाखुखरा में दो एकड़ क्षेत्र में बने इस शीतगृह की भंडारण क्षमता 5000 मीट्रिक टन है। इसमें फ्रेऑन गैस आधारित रेफ्रिजरेशन तकनीक और मल्टी-चेंबर व्यवस्था विकसित की गई है। फलों और हरी सब्जियों के सुरक्षित भंडारण के लिए 125-125 मीट्रिक टन क्षमता वाले दो अलग-अलग चैंबर बनाए गए हैं। शीतगृह के संचालन की जिम्मेदारी बेंगलुरु की मेसर्स रेडवुड होल्डिंग्स एंड रियल्टी सर्विसेज एलएलपी को सौंपी गई है। शीतगृह के निर्बाध संचालन के लिए 100 किलोवाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र भी लगाया गया है। इस सुविधा से किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने, फसल की बर्बादी कम करने और बाजार में बेहतर कीमत पाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अधूरी परियोजना को पूरा करना बड़ी चुनौती थी: शिल्पी नेहा तिर्की
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि किसान की पहचान उसकी जाति, धर्म या लिंग से नहीं, बल्कि उसकी मेहनत, संघर्ष और खेतों में बहाए गए पसीने से होती है। छोटे हों या बड़े, हर किसान का परिश्रम समान रूप से सम्मान का अधिकारी है। उन्होंने कहा कि कृषि मंत्री के रूप में किसानों के हित से जुड़ी इस महत्वपूर्ण परियोजना को पूरा कराना उनके लिए गर्व की बात है। मंत्री ने बताया कि बुढ़ाखुखरा शीतगृह परियोजना वर्ष 2018 में शुरू हुई थी, लेकिन कोरोना महामारी समेत कई कारणों से इसका काम अधूरा रह गया। वर्ष 2022 में विधायक बनने के बाद उन्होंने परियोजना की स्थिति देखी और इसे फिर से शुरू कराने के लिए प्रयास किए। वर्ष 2024 में राज्य सरकार में कृषि मंत्री की जिम्मेदारी मिलने के बाद उन्होंने सबसे पहले इस परियोजना की फाइल निकलवाई। इसके बाद परियोजना को दोबारा शुरू करने और पूरा करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कराई गई।
शिल्पी नेहा तिर्की ने बताया कि परियोजना को आधुनिक तकनीक के अनुरूप विकसित करने के लिए करीब छह करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की जरूरत सामने आई। इसके बाद मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्ताव रखा गया और संबंधित अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों तथा विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय कर काम आगे बढ़ाया गया। मंत्री ने कहा, “किसी भी बड़ी योजना को पूरा करने के पीछे काफी मेहनत, लगन और संघर्ष होता है। बुढ़ाखुखरा का शीतगृह इसका उदाहरण है। हमारा प्रयास है कि किसानों के हित में बनी आधारभूत संरचनाओं का वास्तविक लाभ उन्हें मिले और उनकी उपज सुरक्षित रखने के साथ-साथ उनकी आय बढ़ाने के अवसर भी विकसित हों।”
सहकारी समितियों और एफपीओ को मिले वाहन
कार्यक्रम में बेजफेड से संबद्ध सहकारी समितियों और किसान उत्पादक संगठनों को कृषि उत्पादों के परिवहन और विपणन के लिए कुल ₹1 करोड़ 4 लाख 50 हजार की परिसंपत्तियां वितरित की गईं। इनमें नौ पिकअप वाहन, दो मिनी ट्रक और दो मोबाइल वेंडिंग कार्ट शामिल हैं। इन संसाधनों से किसानों के उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने और विपणन व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम करने में भी सहायता मिल सकती है।
इसके अलावा विभिन्न विभागों के माध्यम से भी परिसंपत्तियां वितरित की गईं। झारक्राफ्ट, रांची को ₹78.849 लाख, जिला पशुपालन कार्यालय को ₹2.48 लाख, झारक्राफ्ट के माध्यम से ₹25.24 लाख और भूमि संरक्षण कार्यालय को ₹20 लाख की परिसंपत्तियां प्रदान की गईं। कार्यक्रम में निदेशक पशुपालन रोबिन टोप्पो, निदेशक मत्स्य अमरेन्द्र कुमार, निदेशक निशा अभिजीत कर, एमडी वेजफेड अभिनव मिश्रा, निदेशक भूमि संरक्षण विकास कुमार, निदेशक समेति रमाशंकर सिंह, निदेशक गव्य डॉ. संजीव कुमार, मांडर के अंचलाधिकारी समेत विभिन्न विभागों के पदाधिकारी और कर्मचारी उपस्थित थे। इस अवसर पर टांगरबसली बाजार शेड का भी उद्घाटन किया गया।




