हजारीबाग : हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में फॉरेंसिक डॉक्टर की कमी के चलते पोस्टमार्टम का काम बुरी तरह प्रभावित हो गया है। अस्पताल में तैनात फॉरेंसिक पैथोलॉजिस्ट डॉ. मनीष कुमार के इस्तीफा देने के बाद शवों का पोस्टमार्टम कराने में भारी परेशानी हो रही है। हालात ऐसे हो गए हैं कि अब पोस्टमार्टम के लिए शवों को हजारीबाग से रांची के रिम्स भेजना पड़ रहा है। इसका सबसे ज्यादा खामियाजा मृतकों के परिवार वालों को भुगतना पड़ रहा है। पहले से ही अपने किसी करीबी को खोने के गम में डूबे परिजनों को अब शव लेकर दूसरे शहर के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। पोस्टमार्टम होने तक इंतजार करना और फिर शव को वापस लाकर अंतिम संस्कार की तैयारी करना उनके लिए और भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में दुख की घड़ी में परिवार वालों की परेशानी और बढ़ गई है।
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फॉरेंसिक डॉक्टर के इस्तीफे से बढ़ी परेशानी
शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल हजारीबाग का प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थान है। यहां फॉरेंसिक पैथोलॉजिस्ट की उपलब्धता नहीं होने से पोस्टमार्टम की स्थानीय व्यवस्था प्रभावित हुई है। डॉ. मनीष कुमार के इस्तीफे के बाद अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक की कमी का असर साफ दिखने लगा है। शवों को रिम्स भेजे जाने से परिजनों को अतिरिक्त भागदौड़ करनी पड़ रही है। ऐसे समय में जब परिवार अपने किसी करीबी की मौत से उबरने की कोशिश कर रहा होता है, तब दूसरे शहर में पोस्टमार्टम कराने की मजबूरी उनकी मुश्किलें और बढ़ा देती है।
पुलिस जांच और अंतिम संस्कार में देरी की आशंका
पोस्टमार्टम मौत की वजह का पता लगाने और कई मामलों में पुलिस जांच को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी प्रक्रिया है। खासकर संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत या आपराधिक मामलों में शव परीक्षण से मिलने वाली जानकारी जांच में अहम भूमिका निभाती है। हजारीबाग में फॉरेंसिक विशेषज्ञ की कमी के कारण शवों को दूसरे संस्थान में भेजना पड़ रहा है। इससे पोस्टमार्टम, शव परिजनों को सौंपने और अंतिम संस्कार की तैयारी में देरी होने की आशंका है। हालांकि, फिलहाल हर मामले में कितनी देरी हो रही है, इसका स्पष्ट आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर की तैनाती जरूरी
इस मामले ने सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मेडिकल कॉलेज जैसे बड़े संस्थान में पोस्टमार्टम की सुविधा सुचारू रखने के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञ की तैनाती जरूरी है। अगर किसी वजह से विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं है, तो अस्पताल में वैकल्पिक व्यवस्था भी होनी चाहिए, ताकि शवों को दूसरे शहर भेजने की मजबूरी कम हो सके। विशेषज्ञ की कमी दूर होने से मृतकों के परिजनों को होने वाली परेशानी कम होगी। साथ ही, पुलिस और प्रशासन को भी कानूनी प्रक्रिया समय पर पूरी करने में मदद मिल सकेगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन को व्यवस्था दुरुस्त करने की जरूरत है।
रंजन चौधरी ने मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य विभाग से की पहल की मांग
हजारीबाग मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम व्यवस्था प्रभावित होने का मामला सांसद के मीडिया प्रतिनिधि रंजन चौधरी ने भी उठाया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट साझा कर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, स्वास्थ्य विभाग, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और हजारीबाग के उपायुक्त का ध्यान इस समस्या की ओर खींचा है। रंजन चौधरी ने फॉरेंसिक पैथोलॉजिस्ट की कमी के चलते शवों को पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेजे जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मामले में तुरंत संज्ञान लेने और पोस्टमार्टम की व्यवस्था को सुचारू कराने की मांग की है।




