गुमला : झारखंड के गुमला जिले में जंगली हाथियों का झुंड पिछले करीब एक महीने से गांव वालों की नाक में दम किए हुए है। अब हाथियों का यह झुंड कामडारा प्रखंड के कोड़ेकेड़ा जंगल में पहुंच गया है। जहां भी हाथी पहुंच रहे हैं, वहां किसानों की फसलों को रौंदकर बर्बाद कर दे रहे हैं। केला, ईख, आलू, फूलगोभी, शकरकंद और धान समेत कई फसलों को हाथियों ने नुकसान पहुंचाया है। हाथियों के डर से गांव वालों की रातों की नींद उड़ गई है। लोग रातभर जागकर अपने खेत-खलिहान और घरों की रखवाली करने को मजबूर हैं। बसिया वन प्रमंडल के अधिकारी शेखर सिंह के मुताबिक, हाथियों के इस झुंड में कुल 23 हाथी हैं, जिनमें पांच छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हैं। वन विभाग की 10 सदस्यीय टीम दिन-रात हाथियों पर नजर रख रही है। टीम की कोशिश है कि हाथियों के झुंड को किसी तरह सारंडा जंगल की ओर खदेड़ दिया जाए, ताकि गांव वालों को इस परेशानी से राहत मिल सके।
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पालकोट और बसिया के बाद कामडारा पहुंचा हाथियों का झुंड
वन विभाग के अनुसार, हाथियों का यह झुंड पहले पालकोट और बसिया क्षेत्र में था। वहां से उसे सिमडेगा की ओर भगाया गया था। करीब पांच से छह दिन पहले झुंड कामडारा क्षेत्र में पहुंच गया। ग्रामीणों ने बताया कि पालकोट और बसिया में भी हाथियों ने फसलों और घरों को नुकसान पहुंचाया था। अब कामडारा क्षेत्र में भी फसलों को रौंदने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। झुंड में शामिल एक हाथी का बच्चा पहले अपने समूह से बिछड़ गया था, जिसे वन विभाग की टीम ने बचाकर दोबारा झुंड से मिला दिया था।
केला, धान और सब्जियों की फसल बर्बाद
हाथियों के झुंड ने इलाके में केला, ईख, आलू, फूलगोभी, शकरकंद और धान समेत कई फसलों को नुकसान पहुंचाया है। खेती पर निर्भर किसानों के लिए यह नुकसान आर्थिक परेशानी बढ़ाने वाला है। फसलों की बर्बादी से उनकी मेहनत पर पानी फिर गया है और परिवारों की आजीविका को लेकर चिंता बढ़ गई है। प्रभावित किसानों में लक्ष्मण ओहदार, बुधवा खड़िया, खिरोधर नाग, रामजीत नाग, सुजीत नाग और सनिका इंदवार समेत अन्य ग्रामीण शामिल हैं। किसानों ने वन विभाग से फसल क्षति का आकलन कर जल्द मुआवजा देने की मांग की है।
वन विभाग की टीम कर रही निगरानी, ग्रामीणों को दिए मशाल और टॉर्च
हाथियों को आबादी वाले इलाकों से दूर रखने के लिए वन विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है। ग्रामीणों को हाथियों को भगाने के लिए मशाल, पटाखे और टॉर्च दिए गए हैं। हालांकि, हाथियों की मौजूदगी के कारण ग्रामीणों में अब भी भय बना हुआ है। प्रभावित लोगों ने वन विभाग से हाथियों को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर भेजने और फसलों के नुकसान का मुआवजा जल्द देने की मांग की है। लगातार हो रहे नुकसान से किसानों के सामने आर्थिक संकट बढ़ने की आशंका है।




