रांची : भारत की अर्थव्यवस्था में छोटे दुकानदारों, खुदरा व्यापारियों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) और कुटीर उद्योगों की अहम भूमिका है। गांवों, कस्बों और छोटे शहरों के व्यापारी जब बिना अनावश्यक कानूनी प्रक्रियाओं और कागजी कार्रवाई के कारोबार कर पाते हैं, तो इससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। 57वीं GST परिषद की बैठक में लिए गए फैसलों को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के तीसरे कार्यकाल यानी ‘मोदी 3.0’ में कारोबार को आसान बनाने और अनावश्यक सरकारी हस्तक्षेप कम करने पर जोर दिया जा रहा है। डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा के अनुसार, GST से जुड़े प्रस्तावित बदलाव छोटे व्यापारियों के प्रति सरकार के भरोसे को मजबूत करने की दिशा में अहम हैं।
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दंडात्मक कार्रवाई के डर को कम करने की पहल
छोटे व्यापारियों के सामने लंबे समय से कर संबंधी प्रक्रियाओं और कानूनी कार्रवाई का डर एक बड़ी चुनौती रहा है। लेख के अनुसार, GST परिषद ने धारा 69 के तहत गिरफ्तारी से जुड़े प्रावधानों में बदलाव की संस्तुति की है। इसके साथ ही अभियोजन की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने और सामान्य दंड को 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है। लेख में 10,000 रुपये से कम के कर मामलों में नोटिस नहीं भेजने के निर्णय का भी उल्लेख किया गया है। इन बदलावों का उद्देश्य छोटे कारोबारियों को अनावश्यक मुकदमेबाजी से राहत देना और कर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं विश्वास आधारित बनाना है।
सालाना रिटर्न और तिमाही कर भुगतान से घटेगा बोझ
पांच करोड़ रुपये तक का वार्षिक कारोबार करने वाले छोटे व्यापारियों के लिए प्रस्तावित वार्षिक रिटर्न और तिमाही कर भुगतान (ARQP) व्यवस्था को व्यावहारिक सुधार बताया गया है। इससे कारोबारियों को बार-बार रिटर्न दाखिल करने और अनुपालन संबंधी प्रक्रियाओं में लगने वाला समय बचाने में मदद मिल सकती है। डॉ. वर्मा का मानना है कि प्रक्रियाओं का बोझ कम होने से छोटे कारोबारी अपने व्यवसाय के विस्तार, ग्राहकों की जरूरतों और कारोबार को बेहतर बनाने पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।
ई-कॉमर्स से छोटे कारोबारियों को मिलेगा बड़ा बाजार
डिजिटल कारोबार के विस्तार के बीच छोटे दुकानदारों और महिला उद्यमियों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए दूसरे राज्यों में व्यापार करने की सुविधा महत्वपूर्ण मानी गई है। इससे स्थानीय उत्पादकों और हस्तशिल्पियों को देशभर के ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिल सकता है। लेख में कहा गया है कि दूसरे राज्यों में अलग से भौतिक कार्यालय या गोदाम स्थापित करने की बाध्यता कम होने से छोटे कारोबारियों को फायदा होगा। इसके अलावा, माल परिवहन के दौरान वाहनों की अनावश्यक जांच पर रोक लगाने और जांच को पुख्ता खुफिया सूचना तथा वरिष्ठ अधिकारियों की पूर्व अनुमति से जोड़ने से लॉजिस्टिक्स लागत घटाने में मदद मिल सकती है।
तेजी से रिफंड मिलने से मजबूत होगी कार्यशील पूंजी
किसी भी कारोबार के सुचारु संचालन के लिए नकदी की उपलब्धता जरूरी है। लेख के अनुसार, पात्र रिफंड दावों में 90 प्रतिशत राशि तीन कार्य दिवसों में सिस्टम के माध्यम से जारी करने और आवेदन स्वीकृति की समय-सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने का प्रस्ताव छोटे कारोबारियों के लिए अहम है। समय पर रिफंड मिलने से कारोबारियों की कार्यशील पूंजी मजबूत हो सकती है और रोजमर्रा के खर्चों के लिए कर्ज पर निर्भरता कम हो सकती है। लेख में कर्मचारियों के स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा, प्लांट और मशीनरी तथा इनपुट सेवाओं पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दायरा बढ़ाने का भी उल्लेख है। इससे औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद जताई गई है।
कारोबार सुगम बनाने और महंगाई नियंत्रित रखने पर जोर
लेख में पीआईबी और वित्त मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि घरेलू आपूर्ति पर प्रभावी औसत कर दर लगभग 13.13 प्रतिशत रह गई है। इसमें GST से पहले की 14.5 प्रतिशत दर का भी उल्लेख किया गया है। लेख के अनुसार, कर आधार बढ़ने और प्रक्रियाओं के आसान होने के साथ राजस्व में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की जा रही है। आवश्यक वस्तुओं पर कम कर दरों और बेहतर लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को महंगाई नियंत्रित रखने में सहायक बताया गया है। इन बदलावों के जरिए कारोबार को आसान बनाने और आर्थिक गतिविधियों को गति देने की कोशिश की जा रही है।
छोटे व्यापारियों पर भरोसे को विकास से जोड़ा
डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नेतृत्व में किए जा रहे सुधार छोटे व्यापारियों को देश की आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण भागीदार बनाने की दिशा में हैं। उनका मानना है कि कर व्यवस्था में सरलता, पारदर्शिता और भरोसा बढ़ने से छोटे कारोबारियों को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिलेंगे।




