नई दिल्ली / रांची: रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ‘जोश – स्वास्थ्य के लिए संयुक्त दल : टीबी मुक्त भारत की ओर’ के राष्ट्रीय शुभारंभ कार्यक्रम में सहभागिता की।कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा, केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी, मनोज तिवारी, योगेंद्र चंदोलिया एवं राज्यसभा सांसद श्रीमती स्वाति मालीवाल सहित स्वास्थ्य, रक्षा एवं अन्य मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
टीबी मुक्त भारत’ केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जन-आंदोलन बनने वाला राष्ट्रव्यापी संकल्प
इस अवसर पर संजय सेठ ने कहा कि ‘टीबी मुक्त भारत’ केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जन-आंदोलन बनने वाला राष्ट्रव्यापी संकल्प है। जोश अभियान के माध्यम से युवाओं की ऊर्जा को टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय अभियान से जोड़ा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कैडेट कोर के कैडेट और माय भारत के स्वयंसेवक समुदायों के बीच टीबी के लक्षणों, समय पर जांच एवं उपचार के प्रति जागरूकता फैलाने के साथ-साथ टीबी से जुड़े भ्रम और सामाजिक कलंक को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
श्री सेठ ने बताया कि अभियान के प्रथम चरण में 11 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के 55 जिलों में 29,123 राष्ट्रीय कैडेट कोर के कैडेटों को प्रशिक्षित किया गया है। ये युवा जमीनी स्तर पर लोगों को जागरूक करने और जरूरतमंदों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने में सहयोग करेंगे।उन्होंने कहा कि टीबी मुक्त भारत के लिए केवल रोकथाम, जागरूकता और जांच पर्याप्त नहीं है। इसके लिए रोग की पहचान, उपचार, सामुदायिक सहभागिता, नवाचार आधारित प्रयास और सक्रिय रूप से रोगियों की खोज पर भी समान रूप से जोर देना आवश्यक है, ताकि टीबी की समय पर पहचान हो और प्रत्येक मरीज को उचित उपचार मिल सके।
टीबी मुक्त भारत’ अभियान को किसी सीमा में नहीं बांधना है
संजय सेठ ने कहा कि ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान को किसी सीमा में नहीं बांधना है। सरकार, समुदाय और नागरिकों को साथ लेकर इसे एक सशक्त जनभागीदारी का अभियान बनाना होगा। युवा शक्ति इस अभियान की ऊर्जा है और जनभागीदारी इसकी सबसे बड़ी ताकत है।उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि टीबी के लक्षणों को नजरअंदाज न करें, समय पर जांच कराएं और अपने आसपास के लोगों को भी जागरूक करें।
उन्होंने कहा कि सरकार, समुदाय और नागरिकों के सामूहिक प्रयास से टीबी के खिलाफ लड़ाई को जन-आंदोलन बनाया जा सकता है और टीबी मुक्त भारत के संकल्प को जन-जन का संकल्प बनाया जा सकता है।




