93% आपत्तियां सही निकलीं तो वोट कटे किसके इशारे पर : आलोक दूबे

रांची : झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने मतदाता सूची और SIR को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। आलोक दूबे ने कहा कि चुनाव जीतने के लिए मोदी जी ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया, लेकिन

आलोक दूबे
आलोक कुमार दूबे (फाइल फोटो)

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रांची : झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने मतदाता सूची और SIR को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। आलोक दूबे ने कहा कि चुनाव जीतने के लिए मोदी जी ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया, लेकिन जनता ने लोकतंत्र की आवाज को बुलंद किया। आलोक कुमार दूबे ने कहा कि कानून में बदलाव किया गया, चीफ जस्टिस को बाहर कर अमित शाह को शामिल किया गया और अपने हिसाब से ज्ञानेश कुमार को चुनाव आयोग में बैठाया गया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठना देश के लोकतंत्र के लिए गंभीर बात है।

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चुनाव आयोग पर भी उठाए सवाल

कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने भी BJP को जिताने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी। हालांकि, उन्होंने कहा कि इन दबावों के बावजूद लोगों ने अपनी आवाज उठाई। आलोक कुमार दूबे ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी ताकत है। जब जनता अपने मताधिकार और संवैधानिक अधिकारों के लिए आवाज उठाती है तो किसी भी दबाव से उस आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस नरीमन के बयान का हवाला देते हुए कहा कि करीब 90 लाख वोटर अपने वोट के अधिकार से वंचित हुए। इसके बावजूद SIR रोकने के लिए इसे पर्याप्त आधार नहीं माना गया, जो दुख की बात है।

93 प्रतिशत आपत्तियां सही निकलने का दावा

आलोक दूबे ने कहा कि वोट कटने के खिलाफ जिन लोगों ने अपील की, उनमें 93 प्रतिशत लोगों के वोट जायज निकले। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर वोट कटने के खिलाफ अपील करने वाले 93 प्रतिशत लोगों के वोट सही पाए गए, तो इतनी बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटे कैसे? उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़ा करता है और इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

’90 लाख लोगों के मताधिकार का सवाल’

आलोक दूबे ने कहा कि करीब 90 लाख लोगों के मताधिकार से वंचित होने का सवाल किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है। यह देश के लोकतंत्र और संविधान से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से एक भी वास्तविक मतदाता का नाम गलत तरीके से हटना गंभीर मामला है। जब यह संख्या लाखों में होने की बात सामने आती है तो निष्पक्ष जांच और जवाबदेही और भी जरूरी हो जाती है।

‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के अधिकार की रक्षा का दावा

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि कांग्रेस पार्टी लोकतंत्र, संविधान और ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के अधिकार की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष करती रहेगी। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतना किसी भी राजनीतिक दल का लक्ष्य हो सकता है, लेकिन चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और जनता के मताधिकार से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। आलोक कुमार दूबे ने कहा कि आज देश की जनता यह जानना चाहती है कि जब 93 प्रतिशत आपत्तियां सही पाई गईं तो गलत तरीके से वोट काटने की जिम्मेदारी किसकी है? इसका जवाब देश की जनता को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता जनता के वोट से मिलती है। अगर उसी वोट को प्रभावित करने की कोशिश होगी तो कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर संवैधानिक संस्थाओं तक हर स्तर पर जनता की आवाज उठाती रहेगी।

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