रांची: झारखंड में जेल सुधार और कैदियों के पुनर्वास से जुड़े मामले में हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत राज्य के ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूट (Open Correctional Institutes) में सुविधाओं और उनकी मॉनिटरिंग को लेकर हाईकोर्ट में स्वत: संज्ञान से चल रहे मामले में राज्य सरकार ने अदालत को महत्वपूर्ण जानकारी दी।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि राज्य की चार सेंट्रल जेलों में ओपन बैरक शुरू करने के प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि ओपन जेल के संचालन और इसके विस्तार से संबंधित प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
4 सेंट्रल जेल में शुरू होगी ओपन बैरक व्यवस्था
राज्य सरकार के अनुसार रांची, हजारीबाग, घाघीडीह और दुमका की सेंट्रल जेलों में ओपन और सेमी-ओपन बैरक व्यवस्था विकसित करने की योजना है। हालिया जानकारी के मुताबिक इन जेलों में चुनिंदा बंदियों को पुनर्वास और रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से ऐसी व्यवस्था विकसित की जा रही है।
ओपन या सेमी-ओपन बैरक व्यवस्था में पात्र और अच्छे आचरण वाले बंदियों को निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के तहत जेल से बाहर काम करने का अवसर मिल सकता है। इसका उद्देश्य बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उनके पुनर्वास में मदद करना है।
3 नवंबर तक दाखिल होगी क्वार्टरली रिपोर्ट
राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि ओपन जेल के संचालन और विस्तारीकरण को लेकर क्वार्टरली रिपोर्ट 3 नवंबर तक अदालत में दाखिल की जाएगी।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 5 नवंबर की तारीख निर्धारित की है। अगली सुनवाई में सरकार की रिपोर्ट के आधार पर ओपन जेल और ओपन बैरक व्यवस्था की प्रगति की समीक्षा की जाएगी।
हजारीबाग में 32 एकड़ जमीन चिन्हित
इससे पहले हुई सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि ओपन जेल के विस्तार के लिए हजारीबाग में 32 एकड़ सरकारी जमीन चिन्हित की गई है। इस संबंध में राज्य के गृह विभाग को प्रस्ताव भेजे जाने की जानकारी भी कोर्ट को दी गई थी।
महिला बंदियों के लिए भी ओपन जेल की विशेष व्यवस्था विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हाईकोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान
ओपन जेल की व्यवस्था और वहां बंदियों को मिलने वाली सुविधाओं की निगरानी का मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूट की व्यवस्था विकसित करने और उसकी मॉनिटरिंग के लिए तंत्र बनाने पर जोर दिया है।
जहां अलग ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूट बनाना संभव नहीं है, वहां मौजूदा जेल परिसरों में ओपन या सेमी-ओपन बैरक विकसित करने की संभावना तलाशने के निर्देश दिए गए हैं। झारखंड में इसी के अनुपालन को लेकर हाईकोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया है।
कैदियों को बेहतर सुविधाएं और पुनर्वास पर जोर
ओपन जेल की व्यवस्था का उद्देश्य केवल कैदियों को कम प्रतिबंध वाली व्यवस्था उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी है। इसके तहत कैदियों को रोजगार, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता से जोड़ने पर जोर दिया जाता है।
इसके साथ ही जेलों में चिकित्सा, भोजन, व्यायाम और अन्य बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने तथा इन व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है।
हाईपावर कमेटी में वंदना दादेल का नाम
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत गठित हाईपावर कमेटी में झारखंड की ओर से वंदना दादेल का नाम नामित किए जाने की जानकारी भी अदालत को दी गई है।
जब तक राज्य में पूर्ण रूप से सेंट्रल ओपन जेल की व्यवस्था विकसित नहीं हो जाती, तब तक रांची, हजारीबाग, दुमका समेत चार सेंट्रल जेलों में अस्थायी रूप से ओपन बैरक की व्यवस्था विकसित करने की दिशा में कदम उठाया जा रहा है।
5 नवंबर को फिर होगी सुनवाई
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता मयंक विभोर ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।
अब सरकार को 3 नवंबर तक ओपन जेल के संचालन और विस्तारीकरण की क्वार्टरली रिपोर्ट अदालत में दाखिल करनी है। मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को होगी।




