रांची: झारखंड के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के कोर्ट के निर्देश का अनुपालन नहीं होने पर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने मामले में अवमानना की कार्रवाई शुरू करने से पहले राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव और DGP को शो कॉज नोटिस जारी किया है। तीनों अधिकारियों से पूछा गया है कि कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं होने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं शुरू की जाए। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।
कोर्ट ने कहा- आदेश के अनुपालन में टालमटोल
चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि थानों में सीसीटीवी लगाने के मामले में सरकार की ओर से दाखिल शपथ पत्र में वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है और मामले में टालमटोल की जा रही है।
अदालत ने कहा कि यदि कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं किया गया तो मुख्य सचिव, गृह सचिव और DGP के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है।
2018 के बाद 450 से ज्यादा कस्टोडियल डेथ का जिक्र
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि वर्ष 2018 के बाद से राज्य में कस्टोडियल डेथ के 450 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था नहीं होना गंभीर विषय है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि थानों में सीसीटीवी लगाने के लिए सरकार की ओर से चार बार टेंडर किए जाने की जानकारी दी गई, लेकिन अब तक इसका कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।
DGP की भूमिका पर भी कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान DGP अदालत में मौजूद थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस थानों में सीसीटीवी लगाने की जिम्मेदारी गृह विभाग पर डालने संबंधी DGP के बयान पर भी कोर्ट ने आपत्ति जताई।
अदालत ने इसे जिम्मेदारी से बचने वाला रवैया माना और कहा कि कोर्ट के आदेश के अनुपालन को लेकर राज्य सरकार को स्पष्ट स्थिति सामने रखनी चाहिए। कोर्ट ने मुख्य सचिव, गृह सचिव और DGP को शो कॉज नोटिस का जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
पिछली सुनवाई में DGP को भी जारी हुआ था अवमानना नोटिस
इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने DGP को अवमानना नोटिस जारी किया था। अदालत ने पूछा था कि पुलिस थानों में सीसीटीवी लगाने के आदेश का अनुपालन नहीं होने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं की जाए।
इससे पहले हाईकोर्ट ने पुलिस थानों में सीसीटीवी लगाने के लिए चार सप्ताह की समयसीमा भी निर्धारित की थी। इसके बावजूद निर्धारित समय में आदेश का पूर्ण अनुपालन नहीं होने पर अदालत ने नाराजगी जताई है।
तरुण महतो की हिरासत में पिटाई के मामले से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के पूर्व इचागढ़ विधानसभा प्रत्याशी तरुण महतो की कथित पुलिस हिरासत में पिटाई से जुड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, 19 नवंबर 2025 की रात इचागढ़ पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर थाने पहुंची थी। वहां उनके साथ कथित तौर पर मारपीट और थर्ड डिग्री टॉर्चर किए जाने के आरोप लगे थे।
तरुण महतो की पत्नी की ओर से इस मामले को लेकर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखा गया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया था। पूर्व की सुनवाई में अदालत ने सरायकेला-खरसावां के एसपी को दस्तावेजों के साथ अदालत में उपस्थित होकर मामले से संबंधित जानकारी देने का निर्देश भी दिया था।
15 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव, गृह सचिव और DGP को जारी शो कॉज नोटिस का जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी। इस सुनवाई में अधिकारियों के जवाब और पुलिस थानों में सीसीटीवी लगाने की मौजूदा स्थिति पर अदालत में आगे सुनवाई होगी।




