रांची: जन्म या मृत्यु का प्रमाणपत्र बनवाने में अब लापरवाही भारी पड़ सकती है। केंद्र सरकार ने जन्म-मृत्यु के पंजीकरण से जुड़ी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नए नियम के तहत जन्म या मृत्यु की घटना के दो साल के भीतर प्रमाणपत्र के लिए आवेदन नहीं किया गया, तो बाद में प्रमाणपत्र बनवाने के लिए न्यायालय की अनुमति जरूरी होगी।
भारत सरकार के महारजिस्ट्रार के नए प्रावधानों को लेकर गृह मंत्रालय की ओर से अधिसूचना जारी की गई है। यह व्यवस्था 1 अक्टूबर से पूरे देश में लागू होने की बात कही गई है।
हालांकि, दो साल से अधिक पुराने मामलों में किस स्तर के न्यायिक पदाधिकारी से अनुमति लेनी होगी और आवेदन के साथ कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी होंगे, यह संबंधित राज्य सरकार की ओर से जारी होने वाली एसओपी (Standard Operating Procedure) के बाद स्पष्ट होगा।
दो साल तक की प्रक्रिया में बदलाव नहीं
नई व्यवस्था का असर मुख्य रूप से उन मामलों पर पड़ेगा, जिनमें जन्म या मृत्यु के दो साल बाद प्रमाणपत्र बनवाने का प्रयास किया जाएगा। दो साल तक के मामलों की मौजूदा प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी जन्म या मृत्यु के बाद निर्धारित समय-सीमा के भीतर पंजीकरण कराने पर पहले की तरह संबंधित स्थानीय निकाय के माध्यम से प्रमाणपत्र जारी किया जा सकेगा।
अभी किस अवधि में क्या है प्रक्रिया?
जन्म या मृत्यु के 30 दिनों के भीतर पंजीकरण कराने पर अस्पताल से मिले संबंधित दस्तावेजों के आधार पर नगर निगम, नगर निकाय या ग्राम पंचायत से प्रमाणपत्र जारी किया जा सकता है।
30 दिन से एक साल तक
यदि 30 दिन के बाद लेकिन एक साल के भीतर पंजीकरण कराया जाता है, तो संबंधित नगर निगम या पंचायत में आवेदन करना होता है। शहरी क्षेत्र में सांख्यिकी विभाग और ग्रामीण क्षेत्र में बीडीओ की मंजूरी के बाद प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।
एक से दो साल तक
एक साल से अधिक और दो साल तक पुराने मामलों में प्रक्रिया अपेक्षाकृत लंबी होती है। इसमें नोटरी का हलफनामा, स्थानीय जनप्रतिनिधि की संस्तुति और पड़ोसियों की गवाही जैसे दस्तावेजों के बाद कार्यपालक दंडाधिकारी यानी एसडीओ कोर्ट के आदेश के आधार पर प्रमाणपत्र जारी किया जाता है।
दो साल बाद क्या बदलेगा?
नई व्यवस्था के बाद दो साल से अधिक पुराने जन्म या मृत्यु के मामलों में केवल स्थानीय निकाय में आवेदन करने से प्रमाणपत्र जारी नहीं होगा। ऐसे मामलों में न्यायालय की अनुमति जरूरी होगी। हालांकि, दो साल से अधिक पुराने मामलों में किस न्यायिक स्तर से आदेश लेना होगा और कौन-कौन से दस्तावेज अनिवार्य होंगे, इसकी विस्तृत जानकारी राज्य सरकार की एसओपी जारी होने के बाद सामने आएगी।
फर्जीवाड़े और बैकडेट प्रमाणपत्र पर लगेगी रोक
नई व्यवस्था का एक अहम उद्देश्य जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्रों में संभावित फर्जीवाड़े और गलत तरीके से बैकडेट प्रमाणपत्र बनवाने पर रोक लगाना भी है। अब तक कई मामलों में लंबे समय बाद नोटरी शपथ पत्र के आधार पर देर से प्रमाणपत्र बनवाने की प्रक्रिया अपनाई जाती थी। नई व्यवस्था में दो साल से अधिक पुराने मामलों में न्यायिक जांच की प्रक्रिया से गुजरना होगा। इससे रिकॉर्ड की सत्यता की जांच और जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।
समय पर बनवा लें जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र
सहायक सांख्यिकी पदाधिकारी राजीव कुमार ने लोगों से जन्म और मृत्यु के बाद समय पर पंजीकरण कराने की अपील की है। उन्होंने कहा कि दो साल बीत जाने के बाद कोर्ट की अनुमति के बिना नगर निगम या पंचायत स्तर से प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि दो साल से अधिक पुराने मामलों में पूरी प्रक्रिया और जरूरी दस्तावेजों को लेकर राज्य सरकार जल्द ही विस्तृत एसओपी जारी करेगी।




