SIR विवाद पर चुनाव आयोग की सफाई, कहा- सभी फैसले सर्वसम्मति से हुए

नई दिल्ली : देशभर में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग में कथित मतभेद की खबरें सामने आने के बाद आयोग ने बुधवार को इस पर अपनी सफाई दी है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी चुनाव आयुक्त की व्यक्तिगत

चुनाव आयोग
सीईसी ज्ञानेश कुमार के साथ चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी।

अपनी भाषा में पढ़ें

नई दिल्ली : देशभर में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग में कथित मतभेद की खबरें सामने आने के बाद आयोग ने बुधवार को इस पर अपनी सफाई दी है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी चुनाव आयुक्त की व्यक्तिगत राय को आयोग का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता है। आयोग के सभी फैसले, जिनमें SIR से जुड़े निर्णय भी शामिल हैं, तीनों चुनाव आयुक्तों की आपसी मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

Read More : बिहार दारोगा भर्ती मुख्य परीक्षा रद्द, नई तारीख का ऐलान बाद में

किन मुद्दों पर उठी थीं आपत्तियां?

यह स्पष्टीकरण द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के सामने आने के बाद आया है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से चार आपत्तियां एक ही दिन दर्ज की गई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने, SIR से संबंधित मामलों में अपील तथा मतदाता डेटाबेस के प्रबंधन जैसे मुद्दों से जुड़ी थीं। इसके अलावा, फॉर्म 6 में बदलाव और चुनावी डेटा के केंद्रीकरण को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।

चुनाव आयोग ने अपनी सफाई में क्या कहा?

चुनाव आयोग ने स्वीकार किया कि अलग-अलग राज्यों में मतदाता सूची से नाम हटाने और वोटर डेटाबेस से जुड़े मामलों पर आयुक्तों ने मुद्दे उठाए थे। हालांकि, आयोग का कहना है कि इन व्यक्तिगत आपत्तियों को SIR या आयोग के अंतिम फैसलों पर औपचारिक असहमति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। आयोग ने कहा कि अलग-अलग मुद्दों पर राय में अंतर होना स्वाभाविक है और चर्चा तथा आपसी सहमति के जरिए ही फैसले आगे बढ़ते हैं। आयोग के अनुसार, पिछले 14 महीनों में शुरुआती मतभेदों के बावजूद कई मामलों में सहमति बनी और सुधार से जुड़े कदम उठाए गए। साथ ही, चुनावी डेटा सिस्टम में किसी भी तरह के केंद्रीय हस्तक्षेप के आरोपों को भी आयोग ने खारिज कर दिया।

विपक्षी दलों ने क्यों उठाए सवाल?

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें पद से हटाने की मांग तक कर डाली है। कांग्रेस ने राहुल गांधी के चुनाव आयोग पर दिए गए भाषण का वीडियो साझा करते हुए आयोग और बीजेपी के बीच मिलीभगत का गंभीर आरोप लगाया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी रिपोर्ट साझा करते हुए CEC की भूमिका पर सवाल उठाए।

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मामले को गंभीर बताते हुए सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेने की अपील की। वहीं, टीएमसी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने भी CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग दोहराते हुए कहा कि राज्यसभा में उनके खिलाफ पहले भी हटाने का प्रस्ताव लाने की पहल हो चुकी है और अब उस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने का समय है। इस प्रकार एक तरफ मीडिया रिपोर्ट में आपत्तियों का दावा किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने सभी फैसलों को सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय बताया है।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram
संबंधित खबरें.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *