झारखंड SIR पर तंजीम की मांग, 63.24 लाख मतदाताओं का मुद्दा उठाया

रांची : झारखंड तंजीम का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को अध्यक्ष शमशेर आलम के नेतृत्व में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, झारखंड से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत चल रही मतदाता सूची प्रक्रिया को लेकर मांग पत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में फहीम अहमद, सरवर आलम,

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मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी से मिले तंजीम

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रांची : झारखंड तंजीम का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को अध्यक्ष शमशेर आलम के नेतृत्व में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, झारखंड से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत चल रही मतदाता सूची प्रक्रिया को लेकर मांग पत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में फहीम अहमद, सरवर आलम, महबूब आलम, तनवीर गद्दी और अब्दुल रहमान शामिल थे।

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63.24 लाख मतदाताओं के सत्यापन का मुद्दा उठाया

तंजीम ने मांग पत्र में कहा कि SIR के तहत मतदाताओं का चिह्नितकरण जारी है और बड़ी संख्या में दावा-आपत्ति आवेदनों की सुनवाई हो रही है। संगठन ने 63.24 लाख मतदाताओं के चिह्नितकरण और संबंधित प्रक्रिया के लिए समय सीमा बढ़ाने की मांग की। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के अनुसार, झारखंड में SIR के तहत 63,24,116 मतदाताओं को सत्यापन के लिए नोटिस जारी किए जाने हैं। तंजीम ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं का चिह्नितकरण 30 सितंबर तक पूरा करना संभव नहीं है। इसलिए प्रक्रिया के लिए अतिरिक्त समय देने और SIR की प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की गई। हालांकि, निर्वाचन आयोग की 2026 की समय-सारणी के अनुसार झारखंड में SIR के तहत दावा-आपत्ति के निपटारे की अवधि 3 अक्टूबर तक और अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 7 अक्टूबर 2026 को निर्धारित है।

शमशेर आलम ने क्या कहा?

मुलाकात के बाद झारखंड तंजीम के अध्यक्ष शमशेर आलम ने कहा कि मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने प्रतिनिधिमंडल की सभी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने बताया कि समय सीमा बढ़ाने और प्रक्रिया को सरल बनाने पर विचार करने की बात कही गई है। शमशेर आलम के अनुसार, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने यह भरोसा भी दिया कि किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम नहीं काटा जाएगा।

अल्पसंख्यक मतदाताओं को लेकर तंजीम ने जताई चिंता

शमशेर आलम ने पड़ोसी राज्य में हुए SIR के अनुभव का हवाला देते हुए विदेशी नागरिक के नाम पर मुसलमानों को निशाना बनाए जाने का उदाहरण पेश किया। उन्होंने कहा कि झारखंड में विदेशी नागरिक के नाम पर अल्पसंख्यक मुसलमानों को परेशान किया गया तो झारखंड तंजीम चुप नहीं बैठेगी। यह बयान झारखंड तंजीम की ओर से दिया गया है; इसे संगठन के आरोप/दावे के रूप में देखा जाना चाहिए।

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