रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने भारी मात्रा में डेटोनेटर और अन्य विस्फोटक पदार्थों की बरामदगी से जुड़े मामले में 10 साल की सजा पाए ट्रक मालिक सुल्तान वाहिद को जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि ट्रक से बड़ी संख्या में विस्फोटक पदार्थ बरामद होने की स्थिति में यह मानना मुश्किल है कि वाहन मालिक को इसकी जानकारी नहीं थी। न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति अरुण कुमार राय की खंडपीठ ने सुल्तान वाहिद की ओर से दाखिल जमानत अर्जी पर सुनवाई के बाद इसे खारिज कर दिया।
Explosive Substance Act के तहत मिली है सजा
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में पाया कि सुल्तान वाहिद को Explosive Substance Act की धारा 4(i) और 5(a) के तहत दोषी ठहराया गया है। दोनों धाराओं के तहत अदालत ने उसे 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जमानत याचिका के जरिए सुल्तान वाहिद की ओर से सजा के दौरान राहत दिए जाने की मांग की गई थी।
ट्रक की तलाशी में मिले थे डेटोनेटर और विस्फोटक
मामला दुमका जिले के काठीकुंड थाना कांड संख्या 45/2016 से जुड़ा है। मामले के अनुसार पुलिस ने एक ट्रक को रोककर उसकी तलाशी ली थी। तलाशी के दौरान वाहन से बड़ी मात्रा में डेटोनेटर समेत अन्य विस्फोटक पदार्थ बरामद किए गए थे। पुलिस ने मौके से ट्रक के चालक और खलासी को गिरफ्तार किया था। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ी और ट्रक मालिक सुल्तान वाहिद को भी आरोपी बनाया गया।
ट्रक में मौजूद नहीं होने की दी गई दलील
जमानत की सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता की ओर से दलील दी गई कि घटना के समय वह ट्रक में मौजूद नहीं था। केवल वाहन का मालिक होने के कारण उसे मामले में आरोपी बनाया गया है। उसकी ओर से यह भी कहा गया कि उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि उसके ट्रक का इस्तेमाल विस्फोटक पदार्थों के परिवहन के लिए किया जा रहा है।
हाईकोर्ट ने दलील को नहीं माना पर्याप्त
हाईकोर्ट ने मामले की परिस्थितियों पर विचार करते हुए कहा कि ट्रक से भारी मात्रा में डेटोनेटर और अन्य विस्फोटक पदार्थ बरामद हुए थे। ऐसे में यह कहना मुश्किल है कि वाहन मालिक को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं थी। अदालत ने आरोपी के धारा 313 CrPC के बयान का भी उल्लेख किया। कोर्ट के अनुसार, ट्रक के स्वामित्व से संबंधित आपत्तिजनक परिस्थितियों के बारे में पूछे जाने पर आरोपी ने ट्रक का मालिक होने से ही पूरी तरह इनकार किया था।
मामले की परिस्थितियों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि वह अपीलकर्ता को जमानत पर रिहा करने के पक्ष में नहीं है। इसके बाद अदालत ने सुल्तान वाहिद की जमानत अर्जी खारिज कर दी। यह मामला वर्ष 2016 के काठीकुंड थाना कांड संख्या 45/2016 से संबंधित है, जिसमें ट्रक से बड़ी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ बरामद किए जाने का आरोप है।




