नई दिल्ली : PM मोदी ने शनिवार को नई दिल्ली में ‘द फ्यूचर ऑफ एनवायरनमेंट एंड क्लाइमेट डायनेमिक्स’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि कार्बन उत्सर्जन की जिम्मेदारी लंबे समय से विकासशील देशों पर गलत तरीके से डाली जाती रही है। PM के मुताबिक, भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन वैश्विक औसत के आधे से भी कम है, जबकि विकसित देशों में यह भारत की तुलना में छह गुना अधिक है। मोदी ने कहा कि भारत इन तथ्यों को वैश्विक मंचों पर मजबूती से रखता है। उन्होंने हर भारतीय से भी पर्यावरण और जलवायु के मुद्दे पर आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने का आह्वान किया। यह दो दिवसीय सम्मेलन राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की ओर से 19 और 20 सितंबर को आयोजित किया जा रहा है। इसमें 17 देशों के न्यायिक प्रतिनिधियों के अलावा पर्यावरण विशेषज्ञ, न्यायाधीश और विभिन्न सरकारी संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।
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पर्यावरण संरक्षण में भारत की पहलों का जिक्र
PM मोदी ने कहा कि भारत दुनिया के साथ मिलकर पर्यावरण संरक्षण के नए मानक तय कर रहा है। उन्होंने ‘वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड’, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA), आपदा रोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन (CDRI), वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन, अंतरराष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन और ‘मिशन लाइफ’ जैसी पहलों का उल्लेख किया। PM ने कहा कि बीते 12 वर्षों में भारत ने पर्यावरण से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में प्रगति की है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत G20 का एकमात्र देश है जिसने पेरिस COP21 में किए गए अपने संकल्पों को समय से पहले पूरा किया है। सौर ऊर्जा का जिक्र करते हुए PM ने कहा कि 12 साल पहले देश की सौर ऊर्जा क्षमता करीब 2 गीगावाट थी, जो अब 160 गीगावाट से अधिक हो गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 31 जुलाई 2026 तक भारत की स्थापित सौर क्षमता 164.59 गीगावाट थी। उन्होंने PM सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का भी उल्लेख किया। सरकार के अनुसार, अगस्त 2026 की शुरुआत तक इस योजना के तहत 50 लाख से अधिक घरों में रूफटॉप सोलर इंस्टॉलेशन हो चुके थे। PM मोदी ने कहा कि भारत क्लीन मोबिलिटी और ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में भी काम कर रहा है। उन्होंने स्वच्छ परिवहन और ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहे बदलावों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर बताया।
पवन ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों का भी जिक्र
PM ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश की पवन ऊर्जा क्षमता में तीन गुना बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने हाइड्रो और परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी विस्तार का उल्लेख किया। परिवहन क्षेत्र में बदलावों का जिक्र करते हुए PM मोदी ने इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री और फास्टैग व्यवस्था का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले देश में हर साल करीब 3,000 इलेक्ट्रिक वाहन बिकते थे, जबकि पिछले साल करीब 25 लाख इलेक्ट्रिक वाहन बिके। PM मोदी ने मेट्रो नेटवर्क के विस्तार को भी पर्यावरण और परिवहन क्षेत्र में बदलाव से जोड़कर बताया। उन्होंने कहा कि 2014 से पहले देश के पांच शहरों में 250 किलोमीटर से कम मेट्रो नेटवर्क था, जबकि अब 20 से अधिक शहरों में 1,000 किलोमीटर से ज्यादा लंबा मेट्रो नेटवर्क है। उन्होंने रेलवे के विद्युतीकरण का भी उल्लेख किया और कहा कि इससे डीजल की खपत में कमी आई है। PM के अनुसार, विकास के साथ पर्यावरण संतुलन पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
जल संरक्षण और प्राकृतिक खेती पर जोर
जल संरक्षण के क्षेत्र में PM मोदी ने अमृत सरोवर और कैच द रेन अभियान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देशभर में 70,000 से अधिक अमृत सरोवर बनाए गए हैं और जल संचयन के लिए बड़ी संख्या में संरचनाएं तैयार की गई हैं। कृषि क्षेत्र में उन्होंने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन का जिक्र किया। PM ने प्राकृतिक खेती के क्लस्टर, जलवायु अनुकूल फसलों और कृषि वानिकी के जरिए कार्बन फुटप्रिंट कम करने की कोशिशों की बात कही। PM ने प्लास्टिक कचरे को पर्यावरण के लिए बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि भारत सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक और रिड्यूस, रीयूज और रीसायकल के जरिए सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने गांवों में गोबरधन योजना के जरिए गोबर और अन्य जैविक कचरे को उपयोगी संसाधनों में बदलने का भी उल्लेख किया। PM मोदी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास को आगे बढ़ाने पर भारत का जोर है।









