दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन हुई विशेष पूजा, सरलता का संदेश

रांची : श्री दिगंबर जैन मंदिर, अपर बाजार रांची में परम पूज्य आचार्य 108 ज्ञेयसागर जी महाराज एवं मुनिश्री 108 नियोग सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में पर्वाधिराज दशलक्षण महापर्व भक्ति और धर्ममय वातावरण में मनाया जा रहा है। महापर्व के तीसरे दिन उत्तम

दशलक्षण महापर्व
महापर्व के तृतीय दिवस हुई विशेष पूजा

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रांची : श्री दिगंबर जैन मंदिर, अपर बाजार रांची में परम पूज्य आचार्य 108 ज्ञेयसागर जी महाराज एवं मुनिश्री 108 नियोग सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में पर्वाधिराज दशलक्षण महापर्व भक्ति और धर्ममय वातावरण में मनाया जा रहा है। महापर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। प्रातःकाल भगवान का अभिषेक, शांतिधारा और दशलक्षण विधान पूजा संपन्न हुई। इसके बाद मुनिश्री नियोग सागर जी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए उत्तम आर्जव धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला।

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मन, वचन और आचरण में हो एकरूपता

मुनिश्री नियोग सागर जी महाराज ने कहा कि उत्तम आर्जव ही सच्चा धर्म है। कुटिलता संसार को बढ़ाती है, जबकि सरलता मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होंने कहा कि आर्जव का अर्थ है कि मन में जो हो, वही वचन में हो और वचन में जो हो, वही आचरण में दिखाई दे। व्यक्ति के मन, वाणी और क्रिया में अलग-अलग भाव होना मायाचार है। मुनिश्री ने कहा कि मायाचारी व्यक्ति पर कोई विश्वास नहीं करता। देव, शास्त्र और गुरु भी ऐसे व्यक्ति से दूर रहते हैं। सरल और ऋजु हृदय वाला व्यक्ति ही भगवान को प्रिय होता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह मंत्र तभी सिद्ध होता है जब वह सीधा हो, उसी तरह आत्मा की सिद्धि के लिए मन का सीधा होना जरूरी है।

छल-कपट छोड़ सरलता अपनाने का संदेश

मुनिश्री नियोग सागर जी महाराज ने करीब 15 वर्ष पहले के बचपन और भाई-बहनों के बीच होने वाले झगड़ों में छिपे प्रेम का उदाहरण देते हुए सरलता और सहजता का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि छल-कपट छोड़कर जीवन में सच्चाई, ईमानदारी और सरलता को अपनाना ही उत्तम आर्जव धर्म का पालन है।

दोनों जैन मंदिरों में हुई विशेष पूजा

रांची स्थित दोनों जैन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना हुई। अपर बाजार जैन मंदिर का बड़ा हॉल श्रद्धालुओं से भरा रहा। यहां विद्वान प्रदीप जी शास्त्री पीयूष के मंत्रोच्चार के साथ वाद्य यंत्रों के माध्यम से सामूहिक पूजन संगीतमय तरीके से संपन्न हुआ। मुख्य बेदी में अभिषेक और शांतिधारा का सौभाग्य सुनील कुमार, प्रदीप कुमार, संभव कुमार छाबड़ा परिवार तथा अमित कुमार, योगेंद्र कुमार, सम्यक कुमार गोयल परिवार को मिला। वासुपूज्य जिनालय में अभिषेक और शांतिधारा का सौभाग्य आलोक कुमार, राजेश कुमार, मनीष कुमार, अक्षत कुमार ठोल्या परिवार तथा सुनील कुमार, शौर्य कुमार काला परिवार को मिला। सामूहिक पूजन की शांतिधारा का सौभाग्य माणिकचंद मोतीलाल काला परिवार, अशोक कुमार अनील एवं सुनील अजमेरा परिवार, सुरेश कुमार, पंकज कुमार, प्रभाष कुमार पांडेय तथा दिलीप कुमार, निर्णय कुमार अजमेरा परिवार को मिला।

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