लीज के बावजूद झारखंड की 62 कोयला खदानें बंद, 2,547 हेक्टेयर वन भूमि अटकी

रांची: झारखंड कोयला संपदा से समृद्ध राज्य है, लेकिन इसके बावजूद राज्य में बड़ी संख्या में कोयला खदानें लंबे समय से बंद पड़ी हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में कुल 160 कोयला खनन पट्टे दर्ज हैं। इनमें से केवल 98 खदानों में संचालन हो

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रांची: झारखंड कोयला संपदा से समृद्ध राज्य है, लेकिन इसके बावजूद राज्य में बड़ी संख्या में कोयला खदानें लंबे समय से बंद पड़ी हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में कुल 160 कोयला खनन पट्टे दर्ज हैं। इनमें से केवल 98 खदानों में संचालन हो रहा है, जबकि 62 खदानें Temporarily Discontinued (TD) या Lapsed (LP) स्थिति में हैं।
बंद या लैप्स खदानों से जुड़ी जमीन का आंकड़ा भी काफी बड़ा है। इन खदानों से कुल 2,547.62 हेक्टेयर वन भूमि जुड़ी हुई है। इसके अलावा 14,221.83 हेक्टेयर निजी एवं सरकारी गैर-वन भूमि भी इन परियोजनाओं के दायरे में है।
ऐसे में सवाल उठता है कि जब इतनी बड़ी जमीन खनन परियोजनाओं के लिए चिह्नित और आवंटित है, तो वर्षों बाद भी इन खदानों में उत्पादन क्यों शुरू नहीं हो पाया।
धनबाद में सबसे ज्यादा 51 खदानें बंद या लैप्स
जिलावार आंकड़ों में धनबाद सबसे आगे है। यहां BCCL, ECL, Tata, SAIL समेत विभिन्न कंपनियों से जुड़ी 51 खदानें TD या LP स्थिति में हैं।
इन खदानों से जुड़ी 385.26 हेक्टेयर वन भूमि है। वहीं निजी और सरकारी गैर-वन भूमि का क्षेत्रफल 10,232.49 हेक्टेयर है। वन और गैर-वन भूमि को मिलाकर कुल क्षेत्रफल 10,617.75 हेक्टेयर है।
रामगढ़ में 6 खदानें बंद
रामगढ़ में 6 खदानें बंद या लैप्स श्रेणी में हैं। इनके लिए 719.97 हेक्टेयर वन भूमि दर्ज है। वहीं गैर-वन भूमि का क्षेत्रफल 2,809.85 हेक्टेयर है। दोनों को मिलाकर कुल क्षेत्रफल 3,529.82 हेक्टेयर है।
बोकारो में कम खदानें, लेकिन वन भूमि सबसे ज्यादा
बोकारो में केवल 3 खदानें TD या LP स्थिति में हैं, लेकिन इनसे जुड़ी वन भूमि का आंकड़ा सबसे ज्यादा है। यहां 1,255.39 हेक्टेयर वन भूमि इन खदानों से जुड़ी है।
इसके अलावा 118.84 हेक्टेयर गैर-वन भूमि है। दोनों को मिलाकर कुल क्षेत्रफल 1,374.23 हेक्टेयर है।
चतरा और पलामू में भी खदानें बंद
चतरा में 1 खदान बंद या लैप्स स्थिति में है। इससे जुड़ी 187 हेक्टेयर वन भूमि और 933.75 हेक्टेयर गैर-वन भूमि है। कुल क्षेत्रफल 1,120.75 हेक्टेयर है।
वहीं पलामू में 1 लैप्स खदान दर्ज है। यहां वन भूमि का क्षेत्रफल शून्य है, जबकि 126.90 हेक्टेयर गैर-वन भूमि इससे जुड़ी है।
बोकारो-रामगढ़ में 1,975 हेक्टेयर वन भूमि
बोकारो और रामगढ़ को मिलाकर बंद या लैप्स खदानों से जुड़ी 1,975.36 हेक्टेयर वन भूमि है। यह राज्य में ऐसी खदानों से जुड़ी कुल 2,547.62 हेक्टेयर वन भूमि का बड़ा हिस्सा है।
खदानें शुरू हुईं तो बढ़ सकता है सरकारी राजस्व
अगर बंद पड़ी खदानों में दोबारा खनन गतिविधियां शुरू होती हैं, तो राज्य सरकार को रॉयल्टी, DMFT, सेस और GST के माध्यम से अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना है।
खनन गतिविधियों में तेजी आने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। इसके अलावा परिवहन, मशीनरी, ठेका कारोबार और खनन से जुड़े अन्य व्यवसायों को भी इसका लाभ मिल सकता है।
बंद/लैप्स खदानों से जुड़ी जमीन
जिला बंद/लैप्स खदानें वन भूमि (हेक्टेयर) निजी एवं सरकारी गैर-वन भूमि कुल क्षेत्रफल (हेक्टेयर)
धनबाद 51 385.26 10,232.49 10,617.75
रामगढ़ 6 719.97 2,809.85 3,529.82
बोकारो 3 1,255.39 118.84 1,374.23
चतरा 1 187.00 933.75 1,120.75
पलामू 1 0.00 126.90 126.90
कुल 62 2,547.62 14,221.83 16,769.45
बंद पड़ी इन खदानों को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी बड़ी मात्रा में जमीन खनन परियोजनाओं के दायरे में होने के बावजूद उत्पादन क्यों ठप है और इन्हें दोबारा शुरू करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
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