पर्युषण महापर्व के पंचम दिवस अहिंसा का संदेश, छोटी हिंसा से बचने की अपील

रांची : पर्युषण महापर्व के पंचम दिवस को ‘अहिंसा दिवस’ के रूप में मनाया गया। श्री साधुमार्गी जैन संघ की ओर से आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में स्वाध्यायी जी ने अहिंसा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में होने

पर्युषण महापर्व
जीवन में दी गई संयम की सीख।

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रांची : पर्युषण महापर्व के पंचम दिवस को ‘अहिंसा दिवस’ के रूप में मनाया गया। श्री साधुमार्गी जैन संघ की ओर से आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में स्वाध्यायी जी ने अहिंसा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में होने वाली छोटी-छोटी हिंसा से बचने का प्रयास करना चाहिए। स्वाध्यायी जी ने कहा कि हर धर्म में अहिंसा को परम धर्म बताया गया है। अहिंसा केवल विचार नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है।

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अर्जुन माली और चंडकौशिक की कथा से दिया संदेश

अर्जुन माली की प्रेरक कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि अन्याय करना गलत है, लेकिन अन्याय को सहते रहना भी उचित नहीं है। भगवान महावीर ने अर्जुन माली का उद्धार कर उसे हिंसा और क्रूरता से मुक्ति का मार्ग दिखाया। चंडकौशिक सर्प के प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि भगवान महावीर की करुणा और अहिंसा की भावना से हिंसक जीव के भीतर भी परिवर्तन संभव हुआ। उन्होंने कहा, “धर्म कोई वॉशिंग पाउडर नहीं है कि पहले इस्तेमाल करें, फिर विश्वास करें। धर्म तो जीवन बीमा है – जीवन के साथ भी और जीवन के बाद भी।” उन्होंने कहा कि धर्म को केवल सुनने या मानने के बजाय उसे अपने आचरण में उतारना जरूरी है।

संयम और धर्मनिष्ठा का दिया संदेश

कार्यक्रम में सुदर्शन श्रावक की कथा के माध्यम से दृढ़ श्रद्धा, संयम और धर्मनिष्ठा का संदेश दिया गया। भगवान महावीर द्वारा बताए गए आगार और अनागार धर्म की भी चर्चा हुई। स्वाध्यायी जी ने कहा कि गृहस्थ श्रावकों के लिए आगार धर्म दैनिक जीवन में संयम और अहिंसा के पालन की प्रेरणा देता है। वहीं, साधु-साध्वियों के लिए अनागार धर्म पूर्ण त्याग और संयम का मार्ग है। राजा श्रेणिक और रानी चेलना के प्रसंग के माध्यम से भी कर्म और श्रद्धा के महत्व को समझाया गया।

मन, वचन और कर्म से अहिंसा का संदेश

उन्होंने कहा कि अहिंसा का वास्तविक अर्थ केवल किसी जीव को कष्ट न देना नहीं है। मन, वचन और कर्म से किसी के प्रति हिंसक भाव नहीं रखना भी अहिंसा का हिस्सा है। पर्युषण पर्व आत्मचिंतन के जरिए जीवन को अधिक संयमित, करुणामय और अहिंसक बनाने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम में राजेश पींचा, अशोक सुराणा, कोमल गेलड़ा, प्रकाश नहाटा, जय पींचा, सुमन बच्छावत एवं करुणा चोरड़िया सहित अनेक श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। पर्युषण महापर्व के दौरान अनेक तपस्याएं भी चल रही हैं। विशाल दसानी, खुशबू दसानी, पूजा बोहरा, पायल कोठारी, ममता पींचा सहित अन्य तपस्वी तप-साधना में रत हैं। उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने सभी तपस्वियों के तप की अनुमोदना करते हुए उनके आत्मकल्याण की मंगलकामना की।

जप दिवस पर अखंड नवकार मंत्र जाप

पर्युषण महापर्व के अगले दिवस ‘जप दिवस’ के अवसर पर श्री साधुमार्गी जैन संघ की ओर से सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक अखंड नवकार मंत्र जाप का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालु अपनी सुविधानुसार एक-एक घंटे के जाप सत्र में सहभागी बनकर नवकार मंत्र का जाप करेंगे। संघ ने अधिकाधिक श्रावक-श्राविकाओं से इस आध्यात्मिक आयोजन में सहभागी बनने का आह्वान किया है।

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