नई दिल्ली : दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए दर्दनाक हादसे के बाद पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने प्रशासनिक व्यवस्था और भ्रष्टाचार को लेकर तीखा हमला बोला है। बेदी ने बार-बार दी गई चेतावनियों के बावजूद समय पर कार्रवाई न होने को व्यवस्था की बड़ी विफलता करार दिया है। इस मामले में उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए चीफ जस्टिस को एक ऑनलाइन पत्र भेजा है।
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नेताओं और MCD अधिकारियों की संपत्ति सार्वजनिक करने की मांग
चीफ जस्टिस को लिखे पत्र में पूर्व आईपीएस अधिकारी ने मांग की है कि दिल्ली हाई कोर्ट मौजूदा और पूर्व विधायकों, पार्षदों और एमसीडी (MCD) अधिकारियों को निर्देश दे, ताकि वे अपने और अपने परिवार के नाम पर मौजूद संपत्तियों का पूरा ब्योरा सामने रखें। बेदी ने आरोप लगाया कि दिल्ली में ऐसी कई संपत्तियां हैं, जिन्हें कानून और स्थापित नियमों का उल्लंघन करके हासिल किया गया है या उनका संचालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि निर्माण गतिविधियों से लेकर संपत्तियों में अवैध रूप से कारोबार चलाने तक की स्थिति सालों से चले आ रहे कथित भाई-भतीजावाद और भ्रष्टाचार के कल्चर का नतीजा है।
Can all currently elected and past MLAs and Corporators and MCD officials be directed by the #DelhiHighCourt to declare the properties that they own directly or in the name of their families in Delhi.
It is being alleged that number of such properties are suspected to have been…— Kiran Bedi (@thekiranbedi) September 11, 2026
‘सीमेंट की बोरी देखकर भी शुरू हो जाती है उगाही’
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की निगरानी की भूमिका पर जोर देते हुए किरण बेदी ने कहा कि अगर किसी मकान के सामने सीमेंट या रेत की एक बोरी भी रखी होती है, तो एमसीडी अधिकारियों को उसमें उगाही का अवसर दिखने लगता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में इसे केवल लापरवाही या निगरानी की कमी नहीं माना जा सकता, बल्कि यह जान-बूझकर की गई अनदेखी का मामला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब व्यवस्था में निरीक्षण और ट्रैकिंग के लिए तकनीक और तंत्र मौजूद हैं, तो फिर इस तरह के हादसों को क्यों नहीं रोका जा सका।
प्रशासन की तुलना मानव शरीर से की
किरण बेदी ने बार-बार होने वाली ऐसी घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासनिक व्यवस्था की तुलना इंसानी शरीर से की। उन्होंने कहा कि जिस तरह शरीर में हर अंग सांस और ऑक्सीजन के प्रवाह से जुड़ा रहता है और स्वस्थ रहता है, उसी तरह प्रशासन के सभी विभागों को भी एक-दूसरे के साथ बेहतर समन्वय बनाकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक नेतृत्व ऐसा नहीं होगा जो खुद मिसाल पेश करे और पूरे सिस्टम को एकजुट रखे, तब तक इस तरह की व्यवस्थागत समस्याओं का समाधान संभव नहीं है।





