नई दिल्ली : आम जनता की रसोई के बजट को लेकर रेटिंग एजेंसी क्रिसिल इंटेलिजेंस (CRISIL Intelligence) की मंगलवार को जारी रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2026 में घरों में बनने वाली शाकाहारी और मांसाहारी थाली की लागत में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मुख्य रूप से प्याज, खाद्य तेल, चावल और रसोई गैस (LPG) की ऊंची कीमतों ने थाली की कुल लागत को ऊंचा बनाए रखा, हालांकि आलू और टमाटर के दामों में आई गिरावट ने इस बढ़ोतरी को काफी हद तक नियंत्रित किया।
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शाकाहारी और मांसाहारी थाली की नई कीमतें
क्रिसिल की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त महीने में शाकाहारी थाली (Veg Thali) की लागत सालाना आधार पर 1 प्रतिशत बढ़कर 29.5 रुपये प्रति प्लेट पर पहुंच गई। वहीं, मांसाहारी थाली की कीमत सालाना आधार पर 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 57.5 रुपये प्रति प्लेट दर्ज की गई।
प्याज 43% तो एलपीजी सिलेंडर 10% हुआ महंगा
रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में थाली की लागत बढ़ाने में सबसे बड़ा हाथ प्याज का रहा।
प्याज : प्याज की कीमत सालाना आधार पर 43 प्रतिशत बढ़कर 40 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जो पिछले साल अगस्त में 28 रुपये प्रति किलोग्राम थी। महाराष्ट्र में मार्च-अप्रैल के दौरान हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है।
रसोई गैस व तेल : खाद्य तेल की कीमतों में सालाना 11 प्रतिशत और एलपीजी (रसोई गैस) की कीमत में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
राहत : हालांकि, आलू की कीमत में 12 प्रतिशत और टमाटर के दामों में 28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिससे थाली के बजट को भारी उछाल से राहत मिली।
मुर्गे के मांस में 10% की तेजी, श्रावण में मिली मासिक राहत
मांसाहारी थाली की लागत में 5 प्रतिशत की सालाना वृद्धि की मुख्य वजह मुर्गे के मांस (Broiler Chicken) की कीमत में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी रही। हालांकि, जुलाई (58.3 रुपये) के मुकाबले अगस्त में मांसाहारी थाली की कीमत 1 प्रतिशत कम रही। हिंदुओं के पवित्र श्रावण माह के दौरान मांग घटने से चिकन के दामों में मासिक आधार पर 4 प्रतिशत की गिरावट आई।
अगले 2-3 महीने राहत के आसार नहीं : क्रिसिल
क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक पुषन शर्मा ने कहा कि आगामी दो से तीन महीनों तक प्याज की कीमतें ऊंची बनी रहने का अनुमान है। इसकी मुख्य वजह रबी फसल की घटती आपूर्ति और खरीफ फसल की आवक में होने वाली देरी है।






