रांची। झारखंड में मैट्रिक और इंटर की परीक्षा देने वाले लाखों विद्यार्थियों के लिए एक अहम खबर सामने आई है। अब तक परीक्षा फॉर्म भरने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल मानी जाती थी, लेकिन झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) ने इसमें एक बड़ा बदलाव करते हुए इसे और व्यवस्थित बनाने की दिशा में कदम उठाया है। वर्ष 2027 में होने वाली मैट्रिक, इंटर, मध्यमा और मदरसा परीक्षाओं के लिए अब हर विद्यार्थी का परमानेंट एजुकेशन नंबर (पेन) और यू-डाइस कोड होना अनिवार्य कर दिया गया है, यानी इन दोनों दस्तावेजों के बिना कोई भी छात्र परीक्षा फॉर्म नहीं भर सकेगा।
क्या है मामला ?
दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में डुप्लीकेट पंजीयन और विद्यार्थियों की गलत पहचान से जुड़े मामलों ने शिक्षा विभाग की चिंता बढ़ाई थी। कई बार एक ही छात्र अलग-अलग स्कूलों से पंजीकृत पाया गया, जिससे न सिर्फ आंकड़ों में गड़बड़ी होती थी, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी भी मुश्किल हो जाती थी। इसी समस्या से निपटने के लिए अब हर छात्र की एक यूनीक पहचान सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है, ताकि पूरे राज्य में विद्यार्थियों का एक भरोसेमंद और एकीकृत डाटाबेस तैयार किया जा सके।
इस फैसले का क्या होगा असर ?
इस फैसले का असर सीधे तौर पर राज्यभर के स्कूलों और विद्यार्थियों पर पड़ेगा। खासकर कोडरमा जैसे जिलों में, जहां हर साल हजारों की संख्या में छात्र इन परीक्षाओं के लिए आवेदन करते हैं, वहां स्कूलों को अब समय रहते अपने सभी विद्यार्थियों का डेटा यू-डाइस पोर्टल पर अपलोड करना होगा, तभी उनका पेन जनरेट हो पाएगा। इसके लिए जैक ने सभी प्रधानाध्यापकों और प्राचार्यों को स्पष्ट समयसीमा भी तय कर दी है।
नई व्यवस्था ने उन स्कूलों के लिए चुनौती भी खड़ी कर दी है
हालांकि, इस नई व्यवस्था ने उन स्कूलों के लिए चुनौती भी खड़ी कर दी है, जिनके पास अब तक अपना यू-डाइस कोड नहीं है। ऐसे संस्थानों को अब जल्द से जल्द संबंधित प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी गई है, ताकि उनके छात्र समय पर परीक्षा फॉर्म भर सकें।
जैक का मानना है कि यह कदम न सिर्फ पंजीयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाएगा, बल्कि आगे चलकर शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़ों जैसे नामांकन दर और ड्रॉपआउट दर को समझने में भी मददगार साबित होगा। आगे जानिए इस नई व्यवस्था से जुड़े सभी जरूरी पहलू।




