झारखंड के पावर सेक्टर में अनुशासन और पारदर्शिता का एक नया दौर शुरू होने जा रहा है. झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने ग्रिड की स्थिरता, ऊर्जा प्रबंधन और वाणिज्यिक जवाबदेही तय करने के लिए झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग (इंट्रा-स्टेट डेविएशन सेटलमेंट मैकेनिज्म एंड रिलेटेड मैटर्स) रेगुलेशन्स, 2026 का ड्राफ्ट जारी कर दिया है. बिजली उत्पादन और खपत में तय शेड्यूल से होने वाले विचलन (डिफरेंस) पर अब सख्त नजर रखी जाएगी और बाजार से जुड़े नियमों के तहत वित्तीय दंड या निपटान किया जाएगा. आयोग ने इस ड्राफ्ट पर स्टेकहोल्डर्स और आम जनता से आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं.
क्या है डेविएशन सेटलमेंट मैकेनिज्म और इसकी जरूरत क्यों पड़ी?
बिजली ग्रिड की सुचारू और सुरक्षित चाल के लिए यह जरूरी है कि जितनी बिजली का शेड्यूल (पूर्वानुमान) तय किया गया है, उत्पादन और खपत भी लगभग उतनी ही हो. यदि इसमें बड़ा अंतर आता है, तो पूरे राज्य की बिजली व्यवस्था और फ्रीक्वेंसी बिगड़ सकती है. केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग के 2024 के रेगुलेशन्स की तर्ज पर झारखंड में भी इसे लागू किया जा रहा है. राज्य में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है, ओपन एक्सेस ट्रांजैक्शन बढ़ रहे हैं और रिन्यूएबल एनर्जी (सौर एवं पवन ऊर्जा) का ग्रिड में एकीकरण हो रहा है. ऐसे में एक मजबूत, पारदर्शी और आधुनिक व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, जो झारखंड की भौगोलिक और तकनीकी जरूरतों के अनुकूल हो.
रेगुलेशन के मुख्य उद्देश्य और दायरे में कौन-कौन आएगा?
* कवर होने वाली इकाइयां: पारंपरिक पावर प्लांट, हाइड्रो पावर स्टेशन (विशेष प्रावधानों के साथ), डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसधारियों, ओपन एक्सेस उपभोक्ता, कैप्टिव जनरेटिंग प्लांट , एनर्जी स्टोरेज सिस्टम और राज्य ग्रिड से जुड़े अन्य खरीदार व विक्रेता.
* रिन्यूएबल एनर्जी को अलग छूट: पवन, सौर और हाइब्रिड रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट्स को फिलहाल इस सामान्य फ्रेमवर्क से बाहर रखा गया है, क्योंकि उनकी उत्पादन क्षमता मौसम और पूर्वानुमान की अनिश्चितताओं पर निर्भर करती है. उनके लिए बाद में अलग से व्यवस्था लाई जाएगी.
अब बाजार तय करेगा नियम
नए नियमों के तहत डेविएशन चार्ज (विचलन शुल्क) को पूरी तरह से मार्केट-डिस्कवर्ड कीमतों और संदर्भ दरों से जोड़ा गया है. इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिजली ग्रिड को संतुलित करने की वास्तविक आर्थिक लागत का वहन वही इकाइयां करें जो शेड्यूल से भटकती हैं.आयोग स्पष्ट कर चुका है कि डेविएशन सेटलमेंट मैकेनिज्म का इस्तेमाल नियमित बिजली व्यापार या खरीद के विकल्प के रूप में नहीं किया जा सकता, बल्कि यह केवल ग्रिड अनुशासन बनाए रखने का एक जरिया है.
फ्रिक्वेंसी डिसिप्लिन और राज्य-विशेष प्रावधान
* इसमें डेविएशन वॉल्यूम लिमिट (विचलन की मात्रा की सीमा) तय की गई है.
* लगातार होने वाले विचलन और साइन-चेंज आवश्यकताओं पर सख्त नजर रखी जाएगी.
* यदि कोई इकाई बार-बार या जानबूझकर ग्रिड नियमों की अनदेखी करती है, तो उस पर भारी वाणिज्यिक पेनल्टी लगाई जाएगी.
हाइड्रो पावर और एनर्जी स्टोरेज सिस्टम के लिए विशेष छूट
झारखंड में कई हाइड्रो पावर प्लांट और स्टोरेज संपत्तियां ऐसी हैं जो सिंचाई, पेयजल आपूर्ति या बाढ़ नियंत्रण जैसे सार्वजनिक उद्देश्यों से जुड़ी हैं. ऐसी यूनिट्स पूरी तरह से व्यावसायिक शेड्यूल पर काम नहीं करतीं, बल्कि पानी की उपलब्धता के आधार पर चलती हैं. नए ड्राफ्ट में रन-ऑफ-रिवर हाइड्रो स्टेशनों और जनता की भलाई से जुड़ी संपत्तियों की परिचालन सीमाओं को ध्यान में रखते हुए विशेष या अलग ट्रीटमेंट का प्रावधान किया गया है.
गेमिंग, गलत घोषणा और कड़ी कार्रवाई
यदि किसी भी स्तर पर गेमिंग (हेराफेरी) या जानबूझकर किए गए विचलन की पुष्टि होती है, तो आयोग कड़े निर्देश जारी करेगा. अवैध रूप से कमाए गए मुनाफे की वसूली की जाएगी और बिजली अधिनियम, 2003 के तहत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. लेटर ऑफ क्रेडिट या अन्य सुरक्षा उपायों के जरिए भुगतान की गारंटी ली जाएगी.साप्ताहिक आधार पर ऊर्जा खातों और विचलन खातों की तैयारी और प्रकाशन किया जाएगा,देरी से भुगतान करने पर डिलेड पेमेंट सरचार्ज (डीपीएस) वसूला जाएगा. राज्य पावर कमेटी के माध्यम से खातों के मिलान और विवादों के निपटारे के लिए एक बेहतर संस्थागत तंत्र स्थापित किया जाएगा.
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