झारखंड में पर्यटन विकास से घटेगी बेरोजगारी, सांवर मल अग्रवाल ने बताया रोडमैप

रांची : झारखंड में पर्यटन को रोजगार और आर्थिक विकास का बड़ा माध्यम बनाया जा सकता है। राज्य की ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के साथ पर्यटन स्थलों का व्यवस्थित विकास किया जाए तो युवाओं, महिलाओं और जनजातीय समुदाय के लिए रोजगार

सांवर मल अग्रवाल

अपनी भाषा में पढ़ें

रांची : झारखंड में पर्यटन को रोजगार और आर्थिक विकास का बड़ा माध्यम बनाया जा सकता है। राज्य की ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के साथ पर्यटन स्थलों का व्यवस्थित विकास किया जाए तो युवाओं, महिलाओं और जनजातीय समुदाय के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। यह विचार झारखंड भाजपा के पूर्व मीडिया प्रभारी सांवर मल अग्रवाल ने व्यक्त किए हैं। सांवर मल अग्रवाल के अनुसार झारखंड प्राकृतिक संसाधनों के साथ-साथ धार्मिक स्थलों, ऐतिहासिक धरोहरों, जंगलों, पहाड़ों, नदियों और झरनों से समृद्ध है। इन सभी क्षेत्रों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित कर स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ा जा सकता है। उनका कहना है कि पर्यटन अवसंरचना, कनेक्टिविटी और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार से न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय लोगों के सामाजिक और आर्थिक जीवन में भी बदलाव आएगा।

Read More : राजस्थान का लोहार्गल धाम, जहां सूरजकुंड में गल गए थे पांडवों के शस्त्र… जानें पौराणिक इतिहास

उन्होंने कहा कि पर्यटकों द्वारा स्थानीय उत्पादों की खरीद से ग्रामीणों और कारीगरों की आय बढ़ सकती है। इसके साथ ही महिलाओं की पर्यटन क्षेत्र में भागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष योजनाएं शुरू की जा सकती हैं। महिलाओं को निशुल्क लाइसेंस उपलब्ध कराने और विशेष रूप से आदिवासी युवाओं को रोजगार के नए अवसर देने जैसे कदम उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मददगार हो सकते हैं।

धार्मिक स्थलों के विकास पर जोर

सांवर मल अग्रवाल ने राज्य की सार्वजनिक भूमि पर स्थित पुराने मंदिरों, मठों, धर्मशालाओं, कुंडों और तीर्थ स्थलों के जीर्णोद्धार और संरक्षण की आवश्यकता बताई। उनका कहना है कि इन स्थलों को बेहतर सुविधाओं के साथ विकसित कर धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है। इससे राज्य को आर्थिक लाभ मिलने के साथ बुजुर्गों, संतों, पुरोहितों और पुजारियों के लिए भी रोजगार एवं सम्मानजनक जीवन के अवसर तैयार किए जा सकते हैं। उन्होंने देवघर, पारसनाथ, रांची के पहाड़ी मंदिर, मां भद्रकाली मंदिर इटखोरी, रामगढ़ का छिन्नमस्तिका मंदिर, चक्रधरपुर का महादेवशाल, नागेश्वर बाबा, बासुकीनाथ, हरिहर धाम, गुमला का बाबा टांगीनाथ धाम, खूंटी का अमरेश्वर धाम, रामगढ़ का टूटी झरना मंदिर, गुरू का सूर्य मंदिर, हजारीबाग के बरकट्ठा के गर्म जलकुंड समेत अन्य धार्मिक एवं प्राकृतिक स्थलों के विकास का सुझाव दिया। अग्रवाल ने पर्यटन स्थलों के लिए अलग से विकास परिषद गठित करने और उनके विकास के लिए विशेष बजट का प्रावधान करने की बात कही। उनके मुताबिक इससे अलग-अलग पर्यटन स्थलों के विकास को योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा।

पर्यटन सर्किट से बढ़ेगा पर्यटकों का ठहराव

उन्होंने झारखंड की सांस्कृतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक और प्राकृतिक विविधता को एक-दूसरे से जोड़कर विशेष पर्यटन सर्किट विकसित करने का सुझाव दिया। इसका उद्देश्य झारखंड को एक समग्र पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना होना चाहिए। उनका मानना है कि पर्यटन सर्किट विकसित होने से पर्यटकों के राज्य में ठहरने की अवधि बढ़ाई जा सकती है। इससे होटल, रेस्टोरेंट, ग्रामीण स्तर पर होमस्टे और अन्य पर्यटन सेवाओं से जुड़े लोगों की आय में वृद्धि होगी।

सड़क, परिवहन और सुरक्षा पर हो विशेष ध्यान

सांवर मल अग्रवाल ने पर्यटन स्थलों तक बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने को जरूरी बताया। उन्होंने पक्की सड़कों, विश्राम गृहों, होटल-रेस्टोरेंट, स्वच्छता, शौचालय और परिवहन सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया। उन्होंने प्रमुख पर्यटन स्थलों को सीधी बस सेवा और रेल सेवा से जोड़ने के साथ हवाई संपर्क को बेहतर बनाने की आवश्यकता बताई। पर्यटकों के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, हेल्प डेस्क और पुलिस व्यवस्था को प्रभावी बनाने तथा महिलाओं और उनके परिवारों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने को भी उन्होंने प्राथमिकता देने की बात कही।

डिजिटल माध्यमों से हो पर्यटन का प्रचार

अग्रवाल ने आधुनिक डिजिटल तकनीक और सोशल मीडिया के माध्यम से झारखंड के पर्यटन स्थलों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने का सुझाव दिया। उन्होंने पर्यटकों की सुविधा के लिए मोबाइल ऐप, वर्चुअल टूर और डिजिटल जानकारी उपलब्ध कराने की बात कही। उनके अनुसार इको-टूरिज्म के तहत जंगलों, पहाड़ों, झरनों और वन्यजीव अभयारण्यों के संरक्षण के साथ उनका योजनाबद्ध विकास किया जा सकता है। इससे पर्यटकों का आकर्षण बढ़ेगा और स्थानीय युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

स्थानीय युवाओं और कारोबारियों को मिले सहयोग

सांवर मल अग्रवाल ने स्थानीय युवाओं को पर्यटन से जोड़ने के लिए टैक्सी और ऑटो जैसी परिवहन सेवाओं के लिए सहायता देने का सुझाव दिया। रिक्शा चालकों, पर्यटन स्थलों पर रेडी-ठेला लगाने वाले छोटे कारोबारियों और अन्य स्थानीय व्यवसायियों को भी सरकारी सहयोग उपलब्ध कराने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि स्थानीय हस्तशिल्प और उत्पादों को पर्यटन बाजार से जोड़ने पर कारीगरों और ग्रामीणों की आय बढ़ सकती है। इससे एक ओर बेरोजगारी की समस्या कम होगी, वहीं दूसरी ओर राज्य की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी। अग्रवाल के मुताबिक झारखंड में पर्यटन को सिर्फ घूमने-फिरने के क्षेत्र के तौर पर नहीं, बल्कि रोजगार, स्वरोजगार, स्थानीय कारोबार और आर्थिक विकास के व्यापक माध्यम के रूप में विकसित करने की जरूरत है। पर्यटन से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों को योजनाबद्ध तरीके से बढ़ावा देकर राज्य के युवाओं और स्थानीय समुदायों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram
संबंधित खबरें.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *