नई दिल्ली। संसद के फिर से बुलाए जाने की संभावनाओं पर संकेत देकर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष की बेचैनी बढ़ा दी है। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं से महिला आरक्षण कानून को जल्द लागू करने का वादा किया है, सरकार इसी दिशा में काम कर रही है।
इंडिया टुडे के अनुसार, रिजिजू ने बताया है कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा। इसमें उन्होंने मांग की कि केंद्रीय मंत्री द्वारा दिए गए संसद का विशेष सत्र बुलाने के संकेत से पहले, परिसीमन के लिए सरकार के प्रस्ताव पर चर्चा करने हेतु एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए।
हालांकि रिजिजू ने 2029 से महिला आरक्षण कानून लागू करने और लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत की वृद्धि के लिए संविधान संशोधन विधेयक लाने हेतु तत्काल सत्र बुलाने पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की, लेकिन उन्होंने कहा कि अतीत में भी बिना सत्रावसान के संसद को फिर से बुलाया गया है।
मानसून सत्र को नहीं किया गया है स्थगित
13 अगस्त को समाप्त हुए मानसून सत्र का अभी तक सत्रावसान नहीं किया गया है। रिजिजू ने कहा, “प्रधानमंत्री पहले ही देश की महिलाओं से स्पष्ट प्रतिबद्धता जता चुके हैं कि महिला आरक्षण और संसद द्वारा महिलाओं को दिया गया वचन लागू किया जाएगा। हम उसी आधार पर काम कर रहे हैं।कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि रिजिजू की टिप्पणी संसद के मानसून सत्र के सत्रावसान में हो रही देरी से जुड़ती है।
खरगे ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में कहा कि यह देश के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण मुद्दा है। कृपया 16-17 अप्रैल 2026 की तरह चीजों को फिर से जबरन थोपने की कोशिश न करें। 16-17 अप्रैल का संदर्भ लोकसभा में विधेयक पर हुई चर्चा और मतदान से है, जिसमें विपक्ष ने सरकार के प्रस्तावित कानून को गिरा दिया था।
लोकसभा की मौजूदा सीटें 25 साल तक स्थिर रखने की मांग
खरगे ने प्रधानमंत्री से कहा कि उनकी पार्टी का रुख स्पष्ट है कि लोकसभा की मौजूदा संख्या 543 सांसद और उसमें राज्यों की हिस्सेदारी को 25 साल तक फ्रीज कर दिया जाना चाहिए। कांग्रेस यह भी चाहती है कि संसद की मौजूदा क्षमता के अनुसार ही 2029 के लोकसभा चुनावों से महिला आरक्षण लागू किया जाए।
कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री को याद दिलाया कि उन्होंने 16 जुलाई को भी उन्हें पत्र लिखकर परिसीमन पर सरकार के प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की थी और कहा था कि राजनीतिक दलों को संसद में प्रस्ताव पेश होने से पहले उनका अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।




