मुंगेर: बिहार के मुंगेर जिले में चल रहे श्रावणी मेले के दौरान आस्था के साथ प्रकृति का खूबसूरत नजारा भी कांवड़ियों को आकर्षित कर रहा है। करीब 26 किलोमीटर लंबे कच्चे कांवड़िया पथ के अंतिम छोर पर मुंगेर-बांका सीमा के पास स्थित कुमारसार नदी इन दिनों कांवरियों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। बहते पानी के बीच कांवड़िए नदी पार कर बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर लगातार आगे बढ़ रहे हैं।
सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम की यात्रा पर निकले कांवड़ियों के कदम जैसे ही कुमारसार नदी के पास पहुंचते हैं, उनकी थकान कम होती दिखाई देती है। रंग-बिरंगे कांवड़, कंधे पर आस्था का भार और जुबां पर ‘बोल बम’ के जयघोष से पूरा कांवड़िया पथ गुंजायमान है।
नदी के ठंडे पानी में उतरते ही कई कांवड़िए कुछ देर रुककर स्नान करते हैं और राहत महसूस करते हैं। लंबे रास्ते तक पैदल चलने के बाद नदी की ठंडी धार उनके पैरों की थकान कम करने का काम कर रही है।
एक से ढाई फीट पानी में नदी पार कर रहे कांवड़िए
फिलहाल कुमारसार नदी में करीब एक से ढाई फीट पानी है। ऐसे में कांवड़िए आसानी से पानी के बीच से होकर नदी पार कर रहे हैं। कुछ श्रद्धालु नदी में स्नान कर रहे हैं, तो कई अपने साथियों के साथ तस्वीरें लेकर यात्रा के यादगार पलों को कैमरे में कैद कर रहे हैं।
कांवड़ियों के लिए नदी का ठंडा पानी सफर के बीच किसी प्राकृतिक राहत से कम नहीं है। दिनभर पैदल चलने के बाद नदी की धार में कुछ समय बिताकर श्रद्धालु आगे की यात्रा के लिए खुद को तरोताजा महसूस कर रहे हैं।
जलस्तर बढ़ने पर पुल से भेजे जाते हैं कांवड़िए
हालांकि, पिछले एक-दो दिनों में कुमारसार नदी का जलस्तर बढ़ा था। इसे देखते हुए प्रशासन की ओर से नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। जलस्तर बढ़ने की स्थिति में कांवड़ियों को नदी के रास्ते से नहीं, बल्कि पुल के जरिए सुरक्षित तरीके से आगे भेजा जाता है।
कांवड़ियों का कहना है कि कुमारसार नदी से होकर गुजरना उनकी यात्रा का सुखद अनुभव है। पानी में स्नान करने से शरीर की थकान दूर होती है और बाबा भोलेनाथ के दर्शन के लिए नया उत्साह मिलता है।
कांवड़िया पथ पर बेहतर इंतजाम से श्रद्धालु संतुष्ट
कई कांवड़ियों ने बताया कि दिनभर पैदल चलने के बाद कुमारसार नदी की ठंडी धार उन्हें कुछ पल का सुकून देती है। यही वजह है कि नदी तक पहुंचते ही श्रद्धालुओं के चेहरों पर थकान के बजाय उत्साह नजर आने लगता है।
कांवड़ियों ने यह भी बताया कि इस बार जिला प्रशासन की ओर से कांवड़िया पथ पर बेहतर इंतजाम किए गए हैं। रास्ते में पेयजल, सुरक्षा और अन्य सुविधाओं का ध्यान रखा गया है। अब तक उन्हें किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा है।
कांवड़िया जयद्रथ कुमार ने कहा कि कुमारसार नदी में उतरकर काफी अच्छा लगता है। पानी में स्नान करने से यात्रा की थकान दूर हो जाती है और आगे बढ़ने के लिए नई ऊर्जा मिलती है।
वहीं कांवड़िया रौशन कुमार ने कहा कि प्रशासन की ओर से इस बार रास्ते में अच्छी व्यवस्था की गई है। पानी और सुरक्षा समेत अन्य सुविधाएं मिल रही हैं, जिससे यात्रा सुखद हो रही है।
कुल मिलाकर कुमारसार नदी इस समय श्रावणी मेले में आस्था, रोमांच और प्रकृति के संगम का केंद्र बनी हुई है। लंबे पैदल सफर के बाद नदी की ठंडी धार में पैर रखते ही कांवड़ियों की थकान मानो मिट जाती है और वे नई ऊर्जा के साथ बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर बढ़ जाते हैं।




