राहुल गांधी के धरने के बाद FIR पर बोले आलोक दूबे, बताया पहला कदम

कांग्रेस नेता आलोक कुमार दूबे ने छात्र साहिल लोचब की शिकायत पर FIR दर्ज होने का स्वागत किया और पुणे के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम को अहम बताया।

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रांची: प्रदेश कांग्रेस कमिटी के महासचिव आलोक कुमार दूबे ने दिल्ली में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के धरने के बाद छात्र साहिल लोचब की शिकायत पर FIR दर्ज किए जाने का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह छात्र को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनके मुताबिक राहुल गांधी का धरना किसी राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि घायल छात्र को न्याय दिलाने और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए था। आलोक कुमार दूबे ने कहा कि राहुल गांधी ने फिर साबित किया है कि जब देश के छात्र और युवा अन्याय के खिलाफ आवाज उठाते हैं, तो कांग्रेस उनके साथ मजबूती से खड़ी रहती है। उन्होंने कहा कि FIR दर्ज होना न्याय की मंजिल नहीं, बल्कि न्याय की दिशा में पहला कदम है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

दिल्ली से पुणे तक छात्र-युवाओं की आवाज

आलोक कुमार दूबे ने कहा कि दिल्ली में छात्र के लिए राहुल गांधी का धरना और पुणे में छात्राओं की आवाज को देश के सामने लाने का प्रयास एक ही संघर्ष की कड़ियां हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व में देश का युवा अपने अधिकार, सम्मान, सुरक्षा और भविष्य के लिए खुलकर आवाज उठा रहा है। उन्होंने कहा कि 22 अगस्त को पुणे में होने वाला ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम विशेष रूप से छात्राओं के लिए है। इसे लेकर देश की बेटियों में जबरदस्त उत्साह है। राहुल गांधी ने छात्राओं को अपनी बात रखने के लिए विशेष मंच देने की घोषणा की है, जहां उनकी आवाज को देश सुनेगा।

‘छात्रों की गूंज’ को बताया ऐतिहासिक पहल

आलोक कुमार दूबे ने कहा कि आजाद हिंदुस्तान के इतिहास में छात्राओं की इतनी बड़ी और मुखर भागीदारी के साथ आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम ऐतिहासिक क्षण बनने जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुणे में देश की बेटियों के साहस, हिम्मत और आत्मविश्वास की ताकत दिखाई देगी। उनके मुताबिक छात्राएं केवल अपने लिए नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के अधिकार, सम्मान, सुरक्षा, समान अवसर और बेहतर भविष्य की आवाज बनकर सामने आएंगी। उन्होंने कहा कि पुणे सामाजिक और शैक्षणिक बदलाव की महत्वपूर्ण भूमि रही है। ऐसे में छात्राओं की आवाज को राष्ट्रीय मंच देना अपने आप में महत्वपूर्ण पहल है। कार्यक्रम को लेकर छात्राओं और युवाओं में उत्साह है और पुणे से उठने वाली उनकी आवाज को सत्ता को भी सुनना पड़ेगा।

‘बेटियों को दया नहीं, बराबरी का अधिकार चाहिए’

आलोक कुमार दूबे ने कहा कि देश की बेटियों को दया नहीं, बल्कि बराबरी का अधिकार, सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार के अवसर और अपने भविष्य का फैसला स्वयं लेने की आजादी चाहिए। ‘छात्रों की गूंज’ इन्हीं सवालों को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने जिस तरह छात्र-युवाओं के मुद्दों को लगातार सड़क से संसद तक उठाया है, उससे युवाओं में नया विश्वास पैदा हुआ है। दिल्ली में छात्र के न्याय के लिए धरना और पुणे में छात्राओं की आवाज के लिए मंच, दोनों यह बताते हैं कि राहुल गांधी की राजनीति युवाओं की आवाज सुनने और उनके साथ खड़े होने की राजनीति है।

आलोक कुमार दूबे ने कहा कि 22 अगस्त को पुणे में देश बेटियों के साहस और हिम्मत को देखेगा, उनकी आवाज सुनेगा और उनकी आकांक्षाओं को समझेगा। उन्होंने कहा कि ‘छात्रों की गूंज’ केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश की बेटियों के आत्मविश्वास और अधिकारों की बुलंद आवाज बनने जा रहा है।

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