वॉशिंगटन : चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका की यात्रा के दौरान अटलांटा जू के लिए दो जायंट पांडा भेजने की घोषणा की है। उन्होंने पिंग पिंग और फू शुआंग नाम के इन दोनों पांडा को चीन और अमेरिका के लोगों के बीच दोस्ती का दूत बताया। शी जिनपिंग ने कहा कि पिंग पिंग और फू शुआंग जल्द ही अटलांटा जू पहुंचेंगे और अमेरिकी लोगों से मिलेंगे। दोनों पांडा चीन के चेंगदू रिसर्च बेस ऑफ जाइंट पांडा ब्रीडिंग में हैं।
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अटलांटा जू के साथ हुआ नया समझौता
अप्रैल 2026 में Zoo Atlanta और China Wildlife Conservation Association (CWCA) के बीच जाइंट पांडा संरक्षण को लेकर नया International Cooperative Research Agreement शुरू हुआ था। इसी समझौते के तहत पिंग पिंग और फू शुआंग को अटलांटा लाया जा रहा है। Zoo Atlanta के मुताबिक, पिंग पिंग नर और फू शुआंग मादा पांडा हैं। दोनों का जन्म चीन के Chengdu Research Base of Giant Panda Breeding में हुआ है। हालांकि, अटलांटा जू ने अभी दोनों पांडा के पहुंचने की निश्चित तारीख की घोषणा नहीं की है। जू की ओर से इनके स्वागत के लिए सुविधाओं को तैयार किया जा रहा है।
चीन-अमेरिका दोस्ती का प्रतीक हैं पांडा
शी जिनपिंग ने पांडा को चीन और अमेरिका के लोगों के बीच दोस्ती का दूत बताते हुए दोनों देशों के बीच सहयोग और संबंधों को आगे बढ़ाने की बात कही। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को ईमानदारी से सहयोग करना चाहिए और साथ मिलकर काम करने की काफी गुंजाइश है। अमेरिका और चीन के बीच पांडा का संबंध पुराना है। 1972 में अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन की चीन यात्रा के बाद चीन ने वॉशिंगटन के नेशनल जू को लिंग-लिंग और ह्सिंग-ह्सिंग नाम के दो पांडा दिए थे। इसके बाद पांडा दोनों देशों के बीच संबंधों का प्रतीक बन गए। अटलांटा जू का चीन के साथ पिछला पांडा समझौता 2024 में समाप्त हुआ था। उस समझौते के तहत लुन लुन और यांग यांग सहित चार पांडा अक्टूबर 2024 में चीन लौट गए थे।
ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात
शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ उनकी बैठक भी हुई। दोनों नेताओं ने चीन-अमेरिका संबंधों और सहयोग से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की। शी ने कहा कि दोनों देशों के संबंध एक और ऐतिहासिक मोड़ पर पहुंचे हैं और बातचीत के दौरान कई मुद्दों पर सहमति बनी। शी जिनपिंग की 23 से 25 सितंबर 2026 तक की अमेरिका यात्रा को दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया गया है।




