विश्वकर्मा पूजा 2026 : जानें शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि

नई दिल्ली : सनातन धर्म में हर साल कन्या संक्रांति के अवसर पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने की विशेष परंपरा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब सूर्य देव अपने मित्र ग्रह बुध की राशि ‘कन्या’ में प्रवेश करते हैं, तो उसे कन्या संक्रांति कहा

विश्वकर्मा पूजा
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नई दिल्ली : सनातन धर्म में हर साल कन्या संक्रांति के अवसर पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने की विशेष परंपरा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब सूर्य देव अपने मित्र ग्रह बुध की राशि ‘कन्या’ में प्रवेश करते हैं, तो उसे कन्या संक्रांति कहा जाता है। इस दिन सृष्टि के प्रथम शिल्पकार और निर्माण के देवता भगवान विश्वकर्मा का पूजन किया जाता है। माना जाता है कि इस दिन औजारों, गाड़ियों और मशीनों की पूजा करने से व्यापार में उन्नति होती है और कार्यक्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष 17 सितंबर 2026 दिन गुरुवार को सूर्य देव सुबह 7 बजकर 58 मिनट पर कन्या राशि में गोचर करेंगे। इसीलिए इसी दिन विश्वकर्मा पूजा की जाएगी।

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विश्वकर्मा पूजा 2026 : पूजन के शुभ मुहूर्त

17 सितंबर को भगवान विश्वकर्मा की पूजा के लिए दिनभर में तीन प्रमुख शुभ मुहूर्त प्राप्त हो रहे हैं :

  • सुबह का मुहूर्त : सुबह 07:58 बजे से सुबह 10:43 बजे तक

  • दोपहर का मुहूर्त : दोपहर 12:15 बजे से दोपहर 01:48 बजे तक

  • शाम का मुहूर्त : शाम 04:52 बजे से शाम 06:24 बजे तक

राहुकाल की अवधि में न करें पूजा

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी शुभ या मांगलिक कार्य के लिए राहुकाल को वर्जित माना गया है। 17 सितंबर को दोपहर 01:48 बजे से दोपहर 03:20 बजे तक राहुकाल रहेगा। श्रद्धालुओं को सलाह दी जाती है कि इस समय अवधि में पूजा-पाठ या नया कार्य शुरू करने से बचें।

भगवान विश्वकर्मा की सरल पूजन विधि

शास्त्रों के अनुसार, पूजा के लिए सबसे पहले एक साफ चौकी पर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद अपने कार्यक्षेत्र के औजारों, उपकरणों या मशीनों को पास में रखें। हाथ में फूल और अक्षत लेकर मंत्रों का जाप करें तथा चारों दिशाओं में अक्षत छिड़कें। इसके बाद घी का दीपक जलाकर जल, पुष्प और सुपारी के साथ पूजा का संकल्प लें। पूजन स्थल के समीप अष्टदल कमल बनाकर उस पर जल का कलश रखें। कलश में पंचपल्लव, सुपारी और दक्षिणा डालें। अंत में भगवान को फल, मिठाई और भोग अर्पित कर कथा सुनें तथा आरती के साथ पूजा संपन्न करें।

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