रांची : रांची विश्वविद्यालय से पीएचडी करने वाले 254 अभ्यर्थियों के लिए अच्छी खबर है। इन सभी को अब शोध करने का मौका मिलेगा। विश्वविद्यालय ने पीएचडी की प्रक्रिया को पहले से आसान और व्यवस्थित बनाने के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं। यानी अब शोधार्थियों को पुराने ढर्रे पर नहीं, बल्कि नए नियमों के हिसाब से अपना रिसर्च पूरा करना होगा। कोर्स वर्क से लेकर प्रोग्रेस रिपोर्ट जमा करने तक के नियमों में बदलाव किया गया है।
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विश्वविद्यालय के शोध निदेशालय की ओर से सभी शोधार्थियों को जरूरी मदद और सहयोग दिया जाएगा। नए कोर्स वर्क के दौरान ही छात्रों को बता दिया जाएगा कि पीएचडी के लिए क्या-क्या करना होगा और शोध की पूरी प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ेगी। इससे शोध के दौरान छात्रों को बार-बार होने वाली परेशानियों से राहत मिलेगी और उनका काम भी आसान होगा।
पीएचडी कोर्स वर्क की अवधि छह महीने, कम अंक पर होंगे फेल
रांची विश्वविद्यालय के नए पीएचडी रेगुलेशन के अनुसार, कोर्स वर्क की अवधि छह महीने यानी एक सेमेस्टर होगी। क्लासरूम में प्रत्येक थ्योरी पेपर के लिए 15 घंटे निर्धारित किए गए हैं। वहीं, प्रैक्टिकल पेपर के लिए 30 घंटे और फील्ड वर्क के लिए 15 दिनों का समय तय किया गया है। प्रत्येक शोधार्थी को अधिकतम दो सेमेस्टर के भीतर कोर्स वर्क की परीक्षा पास करनी होगी। विश्वविद्यालय ने परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर श्रेणी निर्धारण का नियम भी बनाया है। इसके तहत 40 प्रतिशत से कम अंक पाने वाले विद्यार्थियों को फेल माना जाएगा। नए कोर्स वर्क में शोधार्थियों को रिसर्च की प्रक्रिया, जरूरी नियमों और शोध से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जाएगी। कोर्स वर्क पूरा करने के बाद उन्हें अपने विषय पर शोध करने में आसानी होगी।
पीएचडी कोर्स वर्क में होंगे तीन पेपर, प्रत्येक 100 अंक के
रांची विश्वविद्यालय के नए नियमों के तहत पीएचडी कोर्स वर्क में कुल तीन पेपर होंगे। प्रत्येक पेपर 100 अंकों का निर्धारित किया गया है।
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पेपर-1: रिसर्च मेथडोलॉजी एंड कंप्यूटर एप्लिकेशन इन रिसर्च – 100 अंक।
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पेपर-2: सब्जेक्ट स्पेसिफिक कोर्स – 100 अंक।
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पेपर-3: सब्जेक्ट स्पेसिफिक कोर्स – 100 अंक।
तीनों पेपर दो-दो सेक्शन में विभाजित होंगे। प्रत्येक पेपर में सेक्शन ए अनिवार्य रहेगा।
हर छह महीने में जमा करनी होगी प्रोग्रेस रिपोर्ट
पीएचडी के दौरान शोधार्थियों को अपने काम की नियमित जानकारी देनी होगी। इसके लिए प्रत्येक छह महीने में प्रोग्रेस रिपोर्ट संबंधित विषय के विभाग में जमा करना अनिवार्य होगा। विभाग की ओर से इस रिपोर्ट का मूल्यांकन किया जाएगा। जो शोधार्थी निर्धारित समय पर रिपोर्ट जमा नहीं करेंगे, उन्हें विभाग की तरफ से नोटिस भेजा जाएगा। शोध निदेशक डॉ. परवेज हसन ने बताया कि कोर्स वर्क के दौरान ही शोधार्थियों को रिसर्च से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियां मिल जाएंगी।
पहले गाइड मिलने में होती थी परेशानी
रांची विश्वविद्यालय में पहले पीएचडी करने वाले अभ्यर्थियों को शोध निदेशक यानी गाइड मिलने में काफी परेशानी होती थी। पीएचडी प्रवेश परीक्षा में 1200 से अधिक अभ्यर्थियों के सफल होने के बाद भी इनमें से केवल 20 प्रतिशत को ही गाइड मिल पाता था। इस कारण बाकी अभ्यर्थियों को गाइड मिलने के लिए एक से दो साल तक इंतजार करना पड़ता था। अब विश्वविद्यालय की नई व्यवस्था के तहत शोधार्थियों को इस तरह की परेशानी से राहत मिलने की उम्मीद है।



