1954 से शुरू हुई कहानी, 68 साल बाद रचा इतिहास अब अमेरिका को सीधे भेजा पहला पावर ट्रांसफार्मर

प्रयागराज: नैनी में स्थित ट्रांसफॉर्मर निर्माण की यह इकाई सिर्फ एक कारखाना नहीं, बल्कि प्रयागराज के औद्योगिक इतिहास के करीब सात दशक की कहानी समेटे हुए है। वर्ष 1954 में ब्रिटेन की कंपनी जीईसी ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के रूप में शुरू हुई इस इकाई

ट्रांसफॉर्मर निर्माण

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प्रयागराज:   नैनी में स्थित ट्रांसफॉर्मर निर्माण की यह इकाई सिर्फ एक कारखाना नहीं, बल्कि प्रयागराज के औद्योगिक इतिहास के करीब सात दशक की कहानी समेटे हुए है। वर्ष 1954 में ब्रिटेन की कंपनी जीईसी ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के रूप में शुरू हुई इस इकाई ने देश में औद्योगिकीकरण के शुरुआती दौर से लेकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों के स्वामित्व परिवर्तन, बंदी और फिर पुनर्जीवन तक का दौर देखा है। कभी जीईसी, फिर फ्रांस की अरेवा टीएंडडी, उसके बाद अल्स्टॉम टीएंडडी और अंत में अमेरिका की जनरल इलेक्ट्रिक के स्वामित्व में रही यह इकाई वर्ष 2019 में बंद हो गई थी। इसके बाद 2022 में शिरडी साईं इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड ने इसे अधिग्रहण कर दोबारा उत्पादन शुरू कराया। अब यही संयंत्र अमेरिका को पावर ट्रांसफर भेजने की तैयारी में है।
विदेशी निवेश से रखी गई थी नींव
इस इकाई की स्थापना वर्ष 1954 में जीईसी ऑफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के रूप में हुई थी। इसे स्वतंत्रता के बाद भारत में शुरुआती विदेशी निवेश की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में गिना जाता है। ब्रिटेन की कंपनी से जुड़ी इस औद्योगिक इकाई की नींव देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के दौर में पड़ी थी। उस समय देश में भारी उद्योग और बिजली से जुड़े उपकरणों के स्थानीय निर्माण को बढ़ावा देने पर जोर था। प्रयागराज में स्थापित यह संयंत्र इसी औद्योगिक विस्तार का हिस्सा बना।
जीईसी से अरेवा और अल्स्टॉम तक पहुंची कंपनी
समय के साथ कंपनी का स्वामित्व और नाम दोनों बदलते गए। मैनेजर अजय यादव में बताया कि जीईसी के बाद यह इकाई फ्रांस की अरेवा टीएंडडी इंडिया लिमिटेड के अधीन आई। इसके बाद अल्स्टॉम टीएंडडी इंडिया लिमिटेड ने इसका अधिग्रहण किया। बाद में अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक के स्वामित्व में आने के बाद इसका नाम जीई टीएंडडी इंडिया लिमिटेड हुआ। इस दौरान संयंत्र में बिजली क्षेत्र से जुड़े ट्रांसफार्मर और अन्य उपकरणों का निर्माण होता रहा और प्रयागराज का यह औद्योगिक प्रतिष्ठान देश की विद्युत अधोसंरचना से जुड़ा रहा।
 2019 में बंद हुआ संयंत्र
करीब छह दशक से अधिक समय तक अलग-अलग कंपनियों के अधीन चलने के बाद वर्ष 2019 में जीई टीएंडडी ने इस इकाई को बंद कर दिया। उत्पादन बंद होने से संयंत्र के साथ जुड़े कर्मचारियों और स्थानीय औद्योगिक गतिविधियों पर भी असर पड़ा। एक समय सक्रिय रहने वाला यह बड़ा औद्योगिक परिसर कुछ वर्षों तक बंद पड़ा रहा।
2022 में शिरडी साईं ने बदली तस्वीर
बंद संयंत्र को दोबारा चालू कराने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के स्तर पर प्रयास हुए। इसके बाद वर्ष 2022 में हैदराबाद की शिरडी साईं इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड ने बोली जीतकर इकाई का अधिग्रहण किया। नए प्रबंधन के तहत जून 2022 में दोबारा उत्पादन शुरू हुआ। इस तरह करीब तीन साल तक बंद रहने के बाद संयंत्र में मशीनें फिर चलने लगीं और प्रयागराज की औद्योगिक गतिविधि को नया आधार मिला।
पांच महीने में नेपाल भेजा पहला ट्रांसफार्मर
पुनरुद्धार के बाद संयंत्र से बना पहला ट्रांसफार्मर नवंबर 2022 में नेपाल भेजा गया। नए प्रबंधन के तहत जून में उत्पादन शुरू होने के कुछ ही महीनों बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए उत्पाद तैयार होना इस इकाई के लिए अहम पड़ाव रहा। इसके बाद संयंत्र ने घरेलू मांग के साथ निर्यात बाजार की जरूरतों के मुताबिक उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता पर काम जारी रखा।
अब अमेरिका को सीधे भेजा पहला पावर ट्रांसफार्मर
करीब सात दशक पुराने इस संयंत्र ने अब एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पार किया है। अमेरिकी मानकों के अनुरूप तैयार किया गया पहला पावर ट्रांसफार्मर सीधे अमेरिका भेजा गया है। इसके लिए कुल 45 ट्रांसफार्मर का करीब 600 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। ऑर्डर के तहत पहला ट्रांसफार्मर चेन्नई पोर्ट के रास्ते अमेरिका के लिए रवाना किया गया है। यानी प्रयागराज में तैयार ट्रांसफार्मर अब भारत की बिजली व्यवस्था के साथ विदेशी बाजार में भी अपनी जगह बना रहा है।
600 लोगों को मिल रहा रोजगार
बंदी के दौर के बाद दोबारा शुरू हुई इस औद्योगिक इकाई का असर रोजगार पर भी पड़ा है। वर्तमान में यहां करीब 600 लोग काम कर रहे हैं। इनमें लगभग 300 स्थायी कर्मचारी और 300 अस्थायी अथवा संविदा कर्मचारी शामिल हैं। संयंत्र के दोबारा सक्रिय होने से प्रत्यक्ष रोजगार के साथ परिवहन, आपूर्ति, रखरखाव और दूसरे स्थानीय कामों से जुड़े लोगों के लिए भी औद्योगिक गतिविधियां बढ़ी हैं।
सात दशक में बदली कंपनी, कायम रहा प्रयागराज का औद्योगिक रिश्ता
1954 में जीईसी से शुरू हुई यह यात्रा 2026 तक आते-आते कई स्वामियों और नामों से गुजर चुकी है। जीईसी से अरेवा, अरेवा से अल्स्टॉम, अल्स्टॉम से जीई और फिर जीई से शिरडी साईं इलेक्ट्रिकल्स तक पहुंची यह इकाई एक समय बंदी के दौर में भी गई। लेकिन 2022 में दोबारा उत्पादन शुरू होने के बाद अब वही संयंत्र अमेरिका के लिए पावर ट्रांसफार्मर तैयार कर रहा है। इस लिहाज से 1954 से 2026 तक का यह सफर प्रयागराज के औद्योगिक क्षेत्र में बदलाव, संकट और पुनर्जीवन की एक लंबी कहानी है।
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