नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को लेकर दो विरोधी गुटों के बीच चल रहे विवाद पर चुनाव आयोग को फैसला करने का निर्देश दिया। चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची व वी. मोहना की पीठ ने दोनों गुटों को चुनाव आयोग के सामने चल रही कार्यवाही में चार हफ्ते के भीतर अपनी दलीलें पूरी करने को कहा।
Read More : पटना में दो बड़े प्रदर्शन, छात्र-किसानों के आंदोलन से बढ़ी हलचल
ममता बनर्जी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद तीन महीने के भीतर मामले पर फैसला किया जाए। कोर्ट ने यह आदेश पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के उस अंतरिम फैसले को चुनौती दी है, जिसके तहत TMC के नाम और उसके आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को लेकर रोक लगाई गई थी।
चुनाव आयोग ने TMC के नाम और चिह्न पर क्या फैसला लिया था?
चुनाव आयोग ने विवाद पर अंतिम फैसला होने तक दोनों गुटों को ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और उसके आरक्षित चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया था। इसके बाद दोनों विरोधी गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए गए। चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के मुताबिक, दोनों गुटों के नेताओं की दलीलें सुनने के बाद मामले में चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के प्रावधानों के तहत ठोस फैसला लेने की जरूरत बताई गई थी।
चार हफ्ते में पूरी करनी होगी दलील
सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश के बाद दोनों गुटों को चार हफ्ते के भीतर चुनाव आयोग के सामने अपनी दलीलें पूरी करनी होंगी। इसके बाद आयोग को तीन महीने के भीतर TMC के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े विवाद पर अंतिम फैसला करना होगा।



