रांची/वाराणसी: राजधानी रांची के एचईसी परिसर के निकट स्थित ऋषभ नगर (पुन्दाग क्षेत्र) निवासी श्री राम व हनुमान भक्त अमरनाथ सिंह (झारखंड खनिज विकास निगम से अवकाश प्राप्त) ने अपनी अद्भुत प्रतिभा प्रदर्शित कर सचित्र और भावार्थ सहित हनुमान चालीसा प्रकाशित की है। श्री सिंह के मुताबिक पुस्तक के आकार में हनुमान चालीसा के सभी दोहे के भावार्थ व चित्रण सहित प्रकाशित की गई यह अपने ढंग की अनोखी हनुमान चालीसा है।
उन्होंने हाल ही में संकटमोचन हनुमान मंदिर, वाराणसी और श्री हनुमान गढ़ी मंदिर में भी इस अनोखी हनुमान चालीसा की प्रतियां भक्तों के अवलोकनार्थ सौंपी है। अयोध्या धाम के महन्त प्रेम दास जी महाराज के आश्रम में श्री सिंह सपत्नीक हनुमान चालीसा की प्रतियां भक्तों के लिए सौंपी। महन्त प्रेमदास जी महाराज ने श्री सिंह व उनकी धर्मपत्नी कुमकुम सिंह को आशीर्वाद दिया। श्री सिंह द्वारा प्रकाशित तुलसीदास कृत सचित्र श्री हनुमान चालीसा रांची के तपोवन श्री हनुमान मंदिर, कडरू हनुमान मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर में भी भक्तों केपाठ करने हेतु उपलब्ध कराई गई है। श्रीराम दरबार मंदिर, धुर्वा के सभी भक्तों को भी हनुमान चालीसा पुस्तक भेंट किया गया है।
श्री राम मंदिर, धुर्वा, रांची में उनके द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है
श्री सिंह ने बताया कि हनुमान चालीसा की प्रतियां मुम्बई, कोलकाता, बैंगलुरू जैसे शहरों में भी श्री हनुमान मंदिरों में वितरित करने हेतु भक्तों को दिया गया है। डेहरी-डालमियानगर श्री हनुमान मंदिर ट्रस्ट को भी एक सौ प्रतियां दी गई है।
उन्होंने कहा कि श्री राम मंदिर, धुर्वा, रांची में उनके द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स दर्शकों/भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम व सीता माता, अनुज लक्ष्मण,भरत व शत्रुघ्न सहित हनुमान जी की अद्भुत पेंटिंग्स बनाने की प्रेरणा उन्हें अपने पिता स्व. रामचन्द्र सिंह से मिली।
धार्मिक-आध्यात्मिक ऊर्जा का स्त्रोत उनके अराध्य देव भगवान श्री राम हैं
उन्होंने कहा कि जब वे घर में श्री राम व हनुमान जी की पेंटिंग्स बनाने बैठते हैं तो स्वत: उनके हाथ व उंगलियां कैनवास पर चित्रों को उकेरने लगते हैं और भगवान श्री राम व हनुमान जी से संबंधित चित्र तैयार हो जाती है। उन्होंने कहा कि इस धार्मिक-आध्यात्मिक ऊर्जा का स्त्रोत उनके अराध्य देव भगवान श्री राम हैं। रामलला व उनके दरबार के चित्रों को उकेरने में उनकी धर्मपत्नी कुमकुम सिंह की भी सहभागिता रहती है। अमरनाथ सिंह द्वारा तुलसीदास कृत हनुमान चालीसा प्रकाशित किया जाने पर राम-हनुमान भक्तों, उनके शुभचिंतकों, सहयोगियों, रिश्तेदारों व मित्रों ने बधाई व शुभकामनाएं दी हैं।




