रांची: त्याग और बलिदान का पर्व मोहर्रम शनिवार को रांची जिले में शांतिपूर्ण माहौल के बीच संपन्न हो गया। हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से ताजिया और अखाड़ों के जुलूस निर्धारित मार्गों से होकर गुजरे। सेंट्रल मोहर्रम कमेटी की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप सभी जुलूस अपने-अपने खलीफा और अध्यक्ष के नेतृत्व में निकाले गए।
मोहम्मद महजूद ने बताया कि सभी जुलूसों को निर्धारित मार्गों से निकालने के साथ यह भी सुनिश्चित किया गया कि एंबुलेंस, अग्निशमन और जिला प्रशासन के वाहनों का आवागमन किसी भी स्थिति में बाधित न हो। जुलूस के दौरान पारंपरिक लाठी, डंडा, भाला, फरसा और तलवार के प्रदर्शन के साथ कई स्थानों पर हैरतअंगेज करतब भी प्रस्तुत किए गए।

ताजिया और तिरंगे रहे आकर्षण का केंद्र
मोहर्रम के अवसर पर जिलेभर से सैकड़ों ताजिया जुलूस निकाले गए। सभी ताजियों की ऊंचाई निर्धारित मानकों के अनुरूप 10 से 11 फीट के भीतर रखी गई। ताजियों में मुंबई की हाजी अली दरगाह, दिल्ली की जामा मस्जिद, मक्का, मदीना और विभिन्न इमामबाड़ों की आकर्षक झलक देखने को मिली।
कई अखाड़ों के जुलूस में युवाओं के हाथों में तिरंगा नजर आया। देशभक्ति के नारों के बीच कई अखाड़ों के खलीफाओं ने अपने प्रमुख खलीफा को सलामी भी दी। इस दौरान बड़ी संख्या में सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
प्रशासन रहा पूरी तरह सतर्क
मोहर्रम को लेकर रांची जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह मुस्तैद रही। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बल तैनात किए गए थे। निगरानी के लिए विभिन्न स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए और अधिकारी पूरे आयोजन पर लगातार नजर बनाए रहे।
सेंट्रल मोहर्रम कमेटी के नेतृत्व में हरमू, पहाड़ी टोला, गाड़ीखाना, पुरानी रांची, चंदवे, एदलहातू, मोरहाबादी, बरियातू, लालपुर, हिंदपीढ़ी, लोअर बाजार, कांटाटोली, डोरंडा और अन्य क्षेत्रों से जुलूस निर्धारित मार्गों से होते हुए मेन रोड पहुंचे। इसके बाद सभी जुलूस अपने-अपने मार्ग से वापस लौट गए।
स्वागत शिविरों में दिखी सामाजिक एकता
राजधानी के विभिन्न इलाकों में मोहर्रम जुलूस के स्वागत के लिए सैकड़ों स्वागत शिविर लगाए गए। विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक संगठनों ने पानी, शरबत, चना, खिचड़ा, जलेबी और फल वितरित कर जुलूस में शामिल लोगों का स्वागत किया। कई स्थानों पर पगड़ी, स्मृति-चिह्न और पारंपरिक सम्मान भी प्रदान किए गए।
सेंट्रल मोहर्रम कमेटी के महासचिव अकीलुर रहमान, मोहम्मद इस्लाम और प्रमुख खलीफा मोहम्मद महजूद ने कहा कि इस वर्ष पहली बार पूरे रांची शहर में बड़े पैमाने पर मोहर्रम के झंडे और बैनर लगाए गए। उन्होंने इसका श्रेय कमेटी के नौजवान अध्यक्ष जमशेद अली उर्फ पप्पू गद्दी और उनकी टीम को दिया।



