ऑपरेशन ट्राइडेंट: पूर्वोत्तर में ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई, 100 करोड़ रुपये के हवाला नेटवर्क का पर्दाफाश

भारत की पूर्वोत्तर सीमाओं पर सक्रिय एक संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क जांच के दायरे में आ गया है। एक संयुक्त कार्रवाई के दौरान 100 करोड़ रुपये के हवाला लेनदेन का पता चला है, और 1,424 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है। केंद्रीय

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

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भारत की पूर्वोत्तर सीमाओं पर सक्रिय एक संदिग्ध अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क जांच के दायरे में आ गया है। एक संयुक्त कार्रवाई के दौरान 100 करोड़ रुपये के हवाला लेनदेन का पता चला है, और 1,424 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को बताया कि ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के तहत 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, 17.82 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है, और 500 डेटोनेटर तथा 12 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं।

23 अक्टूबर को केंद्रीय एजेंसियों और असम, मिजोरम तथा मणिपुर की पुलिस ने इन तीनों राज्यों में 38 जगहों पर एक साथ छापेमारी की।

माना जा रहा है कि यह संदिग्ध गिरोह भारत, म्यांमार और बांग्लादेश की सीमाओं के पार नशीले पदार्थों की तस्करी करता था। शाह ने इस तस्करी मार्ग को “डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर” (मौत का त्रिकोणीय गलियारा) का नाम दिया है।

100 करोड़ रुपये का हवाला नेटवर्क, 1,424 खाते फ्रीज

‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के तहत जांचकर्ताओं ने 100 करोड़ रुपये के हवाला लेनदेन का पता लगाया है, जो इस संदिग्ध तस्करी नेटवर्क से जुड़े हैं।

अधिकारियों ने 1,424 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया है और 17.82 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है। इस कार्रवाई का मकसद उन वित्तीय माध्यमों को रोकना है जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर यह गिरोह करता था। साथ ही, ड्रग तस्करी में शामिल संदिग्ध लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है।

500 डेटोनेटर्स की बरामदगी ने जांच को एक नया मोड़ दे दिया है। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक यह नहीं बताया है कि इनका इस्तेमाल किसलिए किया जाना था या क्या इनका संबंध किसी हिंसक गतिविधि की योजना से है।

अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट में इन आंकड़ों की जानकारी दी और इस ऑपरेशन को अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई बताया। उन्होंने लिखा, “मोदी सरकार ने ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के जरिए ड्रग्स के खिलाफ एक और जोरदार प्रहार किया है।”

गृह मंत्री ने इस ऑपरेशन में शामिल केंद्रीय एजेंसियों और पूर्वोत्तर के तीनों राज्यों की पुलिस के जवानों को बधाई भी दी।

क्या है ‘डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर’?

इस कथित तस्करी मार्ग में भारत, म्यांमार और बांग्लादेश के सीमावर्ती इलाके शामिल हैं। इन क्षेत्रों में लंबे समय से सीमा पार नशीले पदार्थों की तस्करी एक बड़ी चुनौती रही है। शाह का “डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर” (मृत्यु त्रिकोण गलियारा) शब्द का इस्तेमाल, “गोल्डन ट्रायंगल” (स्वर्ण त्रिकोण) शब्द की उनकी पिछली आलोचना के बाद आया है। “गोल्डन ट्रायंगल” म्यांमार, लाओस और थाईलैंड तक फैले उस क्षेत्र के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक स्थापित नाम है, जहाँ नशीले पदार्थों का उत्पादन होता है।

13 अक्टूबर को ‘बे ऑफ बंगाल इनिशिएटिव फॉर मल्टी-सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक कोऑपरेशन’ (BIMSTEC) के गृह मंत्रियों की एक बैठक के दौरान, शाह ने तर्क दिया कि “गोल्डन ट्रायंगल” शब्द नशीले पदार्थों के व्यापार के विनाशकारी परिणामों को सही ढंग से नहीं दर्शाता है।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक नेटवर्कों से निपटने के लिए क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने का भी आह्वान किया, जिसमें खुफिया जानकारी साझा करना और समन्वित वित्तीय जांच करना शामिल है।

अमित शाह ने दोहराई दिसंबर 2029 की समय-सीमा

‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ ऐसे समय में शुरू किया गया है जब केंद्र सरकार 31 दिसंबर 2029 तक नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्कों को पूरी तरह खत्म करने के अपने लक्ष्य पर काम कर रही है।

25 अक्टूबर को अपनी घोषणा में, शाह ने इस समय-सीमा को फिर से दोहराया और कहा कि प्रवर्तन एजेंसियां ​​नशीले पदार्थों के गिरोहों (कार्टेल) के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखेंगी।

उन्होंने कहा, “भारत तब तक प्रहार करता रहेगा, जब तक कि नशीले पदार्थों के गिरोहों के ताबूत में आखिरी कील नहीं ठोक दी जाती।”

यह हालिया कार्रवाई इस बात को उजागर करती है कि सरकार का ध्यान न केवल सीमाओं के पार नशीले पदार्थों की आवाजाही पर है, बल्कि इस अवैध व्यापार से जुड़े वित्तीय माध्यमों पर भी है।

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