रांची: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने झारखंड में विकास योजनाओं पर बजट खर्च की सुस्त रफ्तार को लेकर हेमंत सोरेन सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए जवाब मांगा है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूछा है कि बजट खर्च की बदहाल स्थिति पर वे मौन क्यों हैं? सामने आकर उन्हें सारी वस्तुस्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बजट में बड़ी-बड़ी घोषणाएं तो करती है, लेकिन उन योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए आवंटित राशि भी समय पर खर्च नहीं कर पा रही है। मुख्यमंत्री बतलाएं कि आखिर इस घोर लापरवाही और उदासीनता के लिए जिम्मेवार कौन है?
श्री साहू ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लगभग सात महीने बीत जाने के बावजूद 22 अक्टूबर तक राज्य के योजना बजट 1,06,200.94 करोड़ रुपये में से महज 31,196.72 करोड़ रुपये, यानी कुल बजट का मात्र 29.38 प्रतिशत ही खर्च हुए हैं। यह आंकड़ा राज्य में विकास योजनाओं के क्रियान्वयन की गति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि राज्य में ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट, जर्जर सड़कें, स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी से जनता त्राहिमाम कर रही है। विकास कार्य पूरी तरह ठप्प हैं। संवेदकों को उनके निर्माण कार्य का पैसा अटका पड़ा है। संवेदकों को समय पर भुगतान नहीं होने का खामियाजा निर्माण कार्यों में लगे मजदूरों को भी भुगतना पड़ रहा है और उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब विकास के लिए बजट में राशि का प्रावधान किया गया है तो उसका समय पर उपयोग क्यों नहीं हो पा रहा है?
श्री साहू ने कहा कि सबसे चिंताजनक स्थिति पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की है, जहां मात्र 4.88 प्रतिशत राशि ही खर्च हुई है। ग्रामीण विकास विभाग में 11.59 प्रतिशत, नगर विकास विभाग में 15.94 प्रतिशत, कल्याण विभाग में 15.69 प्रतिशत और पथ निर्माण विभाग में महज 19.79 प्रतिशत राशि खर्च हुई है। ये ऐसे विभाग हैं, जिनका सीधा सरोकार आम जनता की बुनियादी जरूरतों और विकास कार्यों से है। यह वित्तीय कुप्रबंधन की पराकाष्ठा का नायाब उदाहरण है।
विडम्बना देखिए कि वित्त मंत्री स्वयं बजट खर्च की धीमी रफ्तार पर चिंता जता रहे हैं
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि विडम्बना देखिए कि वित्त मंत्री स्वयं बजट खर्च की धीमी रफ्तार पर चिंता जता रहे हैं और विकास आयुक्त को पीत पत्र लिखकर विभागों को खर्च बढ़ाने का निर्देश दे रहे हैं। निर्माण कार्यों से जुड़े टेंडर छह महीने से डेढ़ साल तक लंबित रहने की बात सामने आ रही है। अब टेंडर प्रक्रिया 60 दिनों में पूरी करने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य में विकास पूरी तरह बेपटरी हो चुका है। सरकार को राज्य की स्थिति से कोई मतलब नहीं है।
श्री साहू ने राज्य सरकार से पूछा है कि क्या केवल बजट पेश कर देना ही विकास की जिम्मेदारी पूरी करना होता है? सरकार बताए कि योजनाओं के क्रियान्वयन में इतनी देरी क्यों हो रही है और जनता को इसका लाभ कब मिलेगा? उन्होंने राज्य सरकार से विभागवार खर्च की स्थिति सार्वजनिक करते हुए कम खर्च करने वाले विभागों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। साथ ही विकास योजनाओं की राशि समय पर खर्च करने और उसकी गुणवत्ता एवं पारदर्शिता को भी सुनिश्चित करने की मांग की है।


