रांची। राजधानी के धुर्वा स्थित जगन्नाथपुर में शनिवार को मौसीबाड़ी से लेकर जगन्नाथ मंदिर तक एक ओर जय जगन्नाथ के जयघोष के नारे गूंजते रहे, तो दूसरी ओर भव्य सांस्कृतिक मंच पर ढोल, मांदर, नगाड़े और बांसुरी की मधुर धुनों की गीत संगीत सुनाई दे रही थी. झारखंड के क्षेत्रीय एवं जनजातीय भाषाओं नागपुरी, कुड़ुख, मुंडारी, खोरठा और अन्य लोकगीतों ने ऐसा समां बांधा कि दर्शक झूमने को मजबूर हो गए और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा मंच सरोबार हो गया ओर मेला में आये लोगों ने भगवान जगन्नाथ के धुरती रथयात्रा में शामिल होनें के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी जमकर आंनद के साथ धूरती रथ यात्रा मेें शामिल हुए।
यह कार्यक्रम पर्यटन, कला-संस्कृति, खेल एवं युवा कार्य विभाग के सांस्कृतिक कार्य निदेशालय की ओर से आयोजित किया गया था। इस सांस्कृतिक कार्यक्रम में झारखंड के विभिन्न जिलों से लोग पहुंचे थे, जहां सैकड़ों कलाकार दलों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुति दी।
जैसे-जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम आगे बढ़ता गया, वैसे-वैसे दर्शकों का उत्साह भी चरम पर पहुंचता गया। ढोल-मांदर की गूंज पर युवा, बुजुर्ग और महिलाएं तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साह बढ़ा रहे थे। तो गीत संगीत के धुन से पैर भी थिरक रहे थे।




