रांची : त्योहार सिर पर है, लेकिन झारखंड के राशन दुकानदारों की जेब खाली है। महीनों से बकाया कमीशन नहीं मिलने से दुकानदारों का सब्र अब जवाब देने लगा है। शनिवार को रांची के अशोक नगर में जुटे राज्यभर के राशन दुकानदारों ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखीं और साफ कर दिया कि अगर त्योहार से पहले बकाया कमीशन का भुगतान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। बैठक में मौजूद वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राशन दुकानदारों को उनकी मांगें सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि मांगों को विभागीय मंत्री इरफान अंसारी के सामने रखा जाएगा और जरूरत पड़ने पर कैबिनेट की बैठक में भी इस पर चर्चा की जाएगी।
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क्यों नाराज हैं राशन दुकानदार?
फेयर प्राइस शॉप डीलर्स एसोसिएशन के अनुसार राज्य के करीब 25 हजार राशन दुकानदारों का पिछले 12 महीने से कमीशन बकाया है। इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2024-25 के कुछ महीनों का कमीशन भी लंबित बताया गया है। सितंबर में राज्य सरकार ने 25 हजार से अधिक PDS दुकानों के लिए डीलर कमीशन के भुगतान मद में राशि जारी करने की जानकारी दी थी। एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहन भैया ने कहा कि विभागीय मंत्री की ओर से कमीशन भुगतान की घोषणा की गई थी, लेकिन 12 महीने के बकाये में से केवल तीन महीने का कमीशन देने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कमीशन की दर डेढ़ रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर दो रुपये प्रति किलो करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने राशन वितरण के दौरान सर्वर की समस्या का मुद्दा भी उठाया।
अलग सर्वर की मांग
मोहन भैया ने कहा कि राज्य के लाभुकों के लिए इस्तेमाल होने वाली सर्वर व्यवस्था में समस्या के कारण कई बार लोग बिना अनाज लिए घर लौट जाते हैं। उन्होंने करीब 25 हजार सरकारी राशन दुकानदारों के लिए अलग सर्वर उपलब्ध कराने की मांग की। झारखंड के आधिकारिक PDS पोर्टल पर सितंबर 2026 के लिए 24,582 कुल दुकानों का रिकॉर्ड दर्ज है। पोर्टल के मुताबिक उस महीने 92.98 प्रतिशत दुकानों में लेनदेन दर्ज हुआ था।
ग्रेन एटीएम को लेकर भी चिंता
संगठन के प्रदेश प्रधान महामंत्री ज्ञानदेव झा ने राज्य में प्रस्तावित ग्रेन एटीएम का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि ग्रेन एटीएम लगाए जाने से 25 हजार राशन दुकानदारों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने कहा कि दुकानदारों के साथ उनके परिवार भी इससे प्रभावित होंगे। संगठन ने सरकार से इस मुद्दे पर विचार करने की मांग की है। ज्ञानदेव झा ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर विचार नहीं करती है तो संगठन आंदोलन करेगा या न्यायालय की शरण लेगा।





