रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितता और ओएमआर शीट में हेरफेर के मामले में सीआईडी ने जांच तेज कर दी है। मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों के खिलाफ जल्द चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी है। जांच एजेंसी के अनुसार, छापेमारी के दौरान जब्त दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर साक्ष्य जुटाए गए हैं। जांच में ओएमआर शीट में कथित छेड़छाड़ और अंकों में बदलाव कर कुछ अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने से संबंधित साक्ष्य मिलने की बात सामने आई है।
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सीआईडी ने 21 जुलाई को जेपीएससी कार्यालय में छापेमारी की थी। इसके अगले दिन 22 जुलाई को सीआईडी थाना कांड संख्या 16/2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। मामले में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ झारखंड प्रतियोगिता परीक्षा अधिनियम, 2023 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है।
इस मामले में जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता समेत पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था। अन्य आरोपितों में परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी, एजेंसी के निदेशक रामवीर सिंह तथा उसके कर्मचारी उस्मान और एबाद शामिल हैं।
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छापेमारी के दौरान सीआईडी ने जेपीएससी कार्यालय से पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क, अन्य डिजिटल उपकरण और कागजी दस्तावेज जब्त किए थे। जांच एजेंसी ने इन सामग्रियों की जांच और समीक्षा की है. कुछ दस्तावेजों को फोरेंसिक जांच के लिए भी भेजा गया था। सीआईडी अब जुटाए गए साक्ष्यों को चार्जशीट में शामिल कर अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही है।
19 अक्टूबर से पहले चार्जशीट दाखिल करने की समयसीमा
मामले में गिरफ्तार पांचों आरोपियों की गिरफ्तारी के 90 दिन 19 अक्टूबर को पूरे हो रहे हैं। ऐसे में सीआईडी के सामने निर्धारित कानूनी समयसीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल करने की चुनौती है। जांच एजेंसी का प्रयास है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र अदालत में पेश किया जाए।
ओएमआर शीट में कथित हेरफेर और अंकों में बदलाव के आरोपों ने जेपीएससी की परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि आरोपियों के खिलाफ आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर होगा।



