JPSC परीक्षा विवाद : 14वीं सिविल सेवा परीक्षा पर SC में सुनवाई आज

नई दिल्ली/रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पारदर्शिता के मुद्दों को लेकर जारी कानूनी लड़ाई अब देश की शीर्ष अदालत पहुंच गई है। झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा 2025 (14वीं JPSC) में कथित धांधली की

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नई दिल्ली/रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पारदर्शिता के मुद्दों को लेकर जारी कानूनी लड़ाई अब देश की शीर्ष अदालत पहुंच गई है। झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा 2025 (14वीं JPSC) में कथित धांधली की स्वतंत्र जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर आज को सुप्रीम कोर्ट में पहली सुनवाई होने जा रही है। यह याचिका हरिशरण देवगन की ओर से दायर की गई है, जिसमें परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से समयबद्ध जांच कराने की मांग की गई है।

CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ करेगी सुनवाई

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ इस याचिका पर सुनवाई करेगी। मालूम हो कि JPSC ने 103 पदों के लिए आयोजित होने वाली मुख्य (Mains) परीक्षा को अगले आदेश तक पहले ही स्थगित कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले याचिकाकर्ता हरिशरण देवगन ने सोशल मीडिया पर झारखंड के छात्रों से एकजुटता की अपील की। उन्होंने कहा कि यह केवल एक कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य की लड़ाई है।

क्या है 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा का विवाद?

19 अप्रैल को आयोजित हुई प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम 2 जुलाई 2026 को जारी किया गया था। याचिका में दावा किया गया है कि एक अभ्यर्थी की OMR शीट की कार्बन कॉपी में दर्ज उत्तरों और आयोग द्वारा जारी पात्रता परिणाम के बीच विसंगतियां पाई गईं। याचिका में प्रश्नपत्रों की छपाई, भंडारण, परिवहन से लेकर OMR शीट के संग्रह, स्कैनिंग और मूल्यांकन की पूरी श्रृंखला की गहन जांच का अनुरोध किया गया है।

राज्य में CID जांच और आंदोलन का माहौल

यद्यपि झारखंड CID इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच कर रही है और अभ्यर्थियों से OMR की कार्बन कॉपियां जमा कराई गई हैं, लेकिन याचिकाकर्ता ने सार्वजनिक भरोसा बनाए रखने के लिए CBI जांच को आवश्यक बताया है। यह सुनवाई ऐसे समय में हो रही है जब राज्य में परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर 26 दिनों तक चला छात्रों का आंदोलन हाल ही में 19 अगस्त को सरकार द्वारा कई भर्ती परीक्षाएं रद्द करने और जांच के आश्वासन के बाद स्थगित हुआ था। हालांकि, हाई कोर्ट द्वारा सरकार के कुछ फैसलों पर रोक लगाए जाने के बाद राज्य में छात्रों और राजनीतिक दलों के बीच घमासान तेज हो गया है।

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