रांची: झारखंड के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को शैक्षणिक सत्र 2027-28 की शुरुआत में नई किताबें उपलब्ध कराने की तैयारी है। कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों के लिए कुल 2 करोड़ 51 हजार 312 पाठ्यपुस्तकों और कार्य पुस्तिकाओं की छपाई कराई जाएगी। इस पर 135 करोड़ 81 लाख 61 हजार 878 रुपये खर्च होने का अनुमान है।
योजना के तहत सभी 24 जिलों में किताबें पहुंचाई जाएंगी, ताकि सत्र शुरू होते ही बच्चों को पढ़ाई के लिए पुस्तकों की कमी का सामना नहीं करना पड़े। कक्षा एक और दो के विद्यार्थियों के लिए पाठ्यपुस्तकों के साथ कार्यपुस्तिकाएं भी शामिल हैं। वहीं, कक्षा तीन से आठ तक के बच्चों के लिए सभी अनिवार्य विषयों की किताबें छापी जाएंगी। छपाई के बाद पुस्तकों को प्रखंड संसाधन केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। वहां से सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में बच्चों के बीच इनका नि:शुल्क वितरण किया जाएगा।
कक्षा छह से आठ तक की किताबों पर सबसे ज्यादा खर्च
कक्षावार आंकड़ों के अनुसार, कक्षा छह के लिए 33,94,154, कक्षा सात के लिए 33,20,469 और कक्षा आठ के लिए 35,35,901 पुस्तकें छापी जाएंगी। कक्षा आठ के लिए सबसे अधिक 21.44 करोड़ रुपये का अनुमानित बजट निर्धारित है। कक्षा सात के लिए 20.01 करोड़ और कक्षा छह के लिए 20.20 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। दूसरी ओर, कक्षा एक के लिए 21,59,650 और कक्षा दो के लिए 21,95,254 पुस्तकें छापी जाएंगी।
निजी स्कूलों के विद्यार्थियों को भी मिलेगा लाभ
झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (जेसीईआरटी) के पाठ्यक्रम का पालन करने वाले निजी और गैर-सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए भी किताबें उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। ये पुस्तकें खुले बाजार में बेची जाएंगी। इसके लिए निर्धारित सरकारी दर पर 20 प्रतिशत कमीशन जोड़कर बाजार मूल्य तय किया जाएगा. इससे निजी स्कूलों में पढ़ने वाले उन विद्यार्थियों को भी जेसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकें मिल सकेंगी, जिन्हें अपने पाठ्यक्रम के लिए इन्हीं पुस्तकों की जरूरत होती है.
कागज की गुणवत्ता के लिए तय किए गए तकनीकी मानक
पुस्तकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कागज की मोटाई और मजबूती के मानक निर्धारित किए गए हैं. कक्षा एक और दो की पुस्तकों के लिए 80 जीएसएम का अंदरूनी कागज और 220 जीएसएम का कवर पेपर इस्तेमाल किया जाएगा। कक्षा तीन से आठ तक की पुस्तकों में 70 जीएसएम का अंदरूनी कागज और 170 जीएसएम का कवर पेपर लगेगा। कागज पर संबंधित पेपर मिल का स्पष्ट वॉटरमार्क होना जरूरी होगा। रद्दी या पुनर्चक्रित गूदे से बने कागज के इस्तेमाल पर रोक रहेगी। आपूर्ति से पहले कागज की गुणवत्ता की जांच सरकारी प्रयोगशाला में कराई जाएगी।
गिरिडीह में सबसे अधिक पुस्तकों की मांग
जिलावार मांग के अनुसार, गिरिडीह में सबसे अधिक 2.94 लाख पुस्तक सेट वितरित करने का लक्ष्य है। पलामू में 2.70 लाख, पश्चिमी सिंहभूम में 2.05 लाख, देवघर में 2 लाख, साहिबगंज में 1.88 लाख और गोड्डा में 1.87 लाख सेट की जरूरत बताई गई है। राज्यभर में 33.68 लाख से अधिक पुस्तक सेट की आपूर्ति का लक्ष्य रखा गया है। योजना का उद्देश्य नए शैक्षणिक सत्र में बच्चों तक समय पर पाठ्यपुस्तकें पहुंचाना और उनकी पढ़ाई निर्बाध रखना है।




