नई दिल्ली : इस वर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर रवि योग और शुक्ल योग का अत्यंत दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस बार सोमवार के दिन जहां एक ओर सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य के लिए निर्जला तप करेंगी, वहीं दूसरी ओर घरों और पंडालों में भगवान श्रीगणेश का स्वागत किया जाएगा। ब्रह्म और इंद्र योग के बीच हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का त्योहार एक ही दिन पड़ने से श्रद्धालुओं में पर्व को लेकर विशेष उत्साह है। हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर की सुबह 07:08 बजे से प्रारंभ होकर 14 सितंबर (2026) की सुबह 07:06 बजे तक रहेगी। तृतीया तिथि सूर्योदय काल में विद्यमान रहने के कारण हरतालिका तीज का पर्व 14 सितंबर को ही मनाया जाएगा।
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हरतालिका तीज पूजन का शुभ मुहूर्त
हरतालिका तीज के दिन तृतीया तिथि में पूजन करने वाली महिलाओं को सुबह 07:06 बजे से पूर्व ही पूजा की शुरुआत कर लेनी चाहिए। इसके अलावा दिनभर पूजन के कई अन्य शुभ मुहूर्त भी उपलब्ध रहेंगे :
अमृत काल : सुबह 07:18 बजे से 08:57 बजे तक
अभिजित मुहूर्त : सुबह 11:37 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक
विजय मुहूर्त : दोपहर 02:05 बजे से 02:55 बजे तक
प्रदोष काल (संध्या पूजा) : शाम 06:28 बजे से रात 08:47 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:12 बजे से 06:36 बजे तक
निशिता मुहूर्त : रात 11:39 बजे से 12:25 बजे (15 सितंबर) तक
एक ही दिन शिव-पार्वती और गणपति की होगी विशेष आराधना
हरतालिका तीज को सनातनी परंपरा के प्रमुख व्रतों में सबसे कठिन माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं सूर्योदय से पूर्व स्नान के बाद निर्जला व्रत का संकल्प लेती हैं। धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठिन तपस्या की थी। इसी आस्था के साथ महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती और प्रथम पूज्य गणेश जी की विधि-विधान से मिट्टी की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना करती हैं।
Disclaimer : यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग में बताए गए विवरणों पर आधारित है। इसकी सटीकता की पुष्टि के लिए संबंधित विशेषज्ञ या ज्योतिषाचार्य से सलाह लेना उचित होगा।





