रांची: झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता और राज्य के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सीएम हेमंत सोरेन से पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्तियों को लेकर कई सवाल उठाए हैं। मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य में ईमानदार और बेदाग अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद महत्वपूर्ण और संवेदनशील पदों पर विवादित अधिकारियों की नियुक्ति की जा रही है।
बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील पदों के साथ-साथ भ्रष्टाचार की जांच जैसी जिम्मेदारियों पर भी ऐसे अधिकारियों को तैनात क्यों किया जा रहा है, जिनकी कार्यशैली और भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
डीजीपी की नियुक्ति को लेकर सरकार से सवाल
मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सवाल किया कि उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद एक अधिकारी को छोड़कर यूपीएससी से अनुशंसित किसी अधिकारी को डीजीपी क्यों नहीं बनाया गया। उन्होंने दावा किया कि जिस अधिकारी को डीजीपी बनाया गया, उसे भी समय से पहले पद से हटा दिया गया।
उन्होंने अखिल भारतीय सेवा के नियमों का हवाला देते हुए सेवानिवृत्त अधिकारियों को डीजीपी पद पर बनाए रखने को लेकर भी सरकार से सवाल किया। मरांडी ने पूछा कि क्या डीजीपी का पद संवैधानिक जिम्मेदारी के बजाय राजनीतिक कृपा का पद बन गया है?
‘अधिकारी कानून के बजाय सत्ता के दबाव में काम करेगा’
विपक्ष के नेता ने कहा कि जब किसी अधिकारी को यह महसूस होने लगे कि उसकी कुर्सी कानून और नियमों से नहीं, बल्कि सत्ता की कृपा से सुरक्षित है, तो उसके सामने निष्पक्ष तरीके से काम करने की चुनौती पैदा होती है।
उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में अधिकारी कानून के बजाय राजनीतिक आकाओं के दबाव में काम करने को मजबूर हो सकता है। मरांडी ने विशेष रूप से सीआईडी और एसीबी जैसी जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि यदि इन एजेंसियों की कमान ऐसे अधिकारियों के हाथ में होगी, जिनकी निष्पक्षता को लेकर सवाल उठते हैं, तो आम जनता उनके काम पर भरोसा कैसे करेगी?
‘पुलिस किसी सरकार या नेता की निजी जागीर नहीं’
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पुलिस किसी सरकार या नेता की निजी जागीर नहीं है। पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था को संविधान और जनता के प्रति जवाबदेह होना चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि पुलिस व्यवस्था को राजनीतिक दबाव से मुक्त किया जाए और ईमानदार एवं बेदाग अधिकारियों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जाएं।
मरांडी ने कहा कि कानून को सत्ता से ऊपर रखा जाना चाहिए और अधिकारियों की नियुक्ति राजनीतिक पसंद-नापसंद के आधार पर नहीं, बल्कि योग्यता, ईमानदारी और संवैधानिक जिम्मेदारियों के अनुरूप होनी चाहिए।
‘सत्ता स्थायी नहीं, फैसलों का हिसाब इतिहास रखता है’
बाबूलाल मरांडी ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सत्ता स्थायी नहीं होती, लेकिन सत्ता में रहते हुए लिए गए फैसलों का हिसाब इतिहास जरूर रखता है।
उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन की निष्पक्षता लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी जरूरत है। ऐसे में सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पुलिस और जांच एजेंसियां किसी राजनीतिक दबाव के बजाय कानून और संविधान के अनुसार काम करें।