रांची : झारखंड के जंगलों में आग लगने की घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 7668 आगलगी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। महुआ बीनने, तेंदू पत्ता बटोरने और मानवीय लापरवाही को जंगलों में आग लगने की प्रमुख वजहों में गिना गया है। कोल्हान के जंगलों में आग की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली रही। तुलनात्मक आंकड़ों में एक अवधि में आग की 763 घटनाएं दर्ज हुई थीं, जबकि बाद की अवधि में यह संख्या 690 रही। सारंडा में मामले 575 से बढ़कर 687 हो गए। चाईबासा के जंगलों में आग की घटनाएं 187 से घटकर 164 रहीं। पोराहाट में भी आगलगी के मामलों में कमी आई और आंकड़ा 504 से घटकर 162 हो गया।
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रांची समेत आसपास के वन क्षेत्र भी प्रभावित
राजधानी रांची और आसपास के इलाकों में भी जंगलों में आग की घटनाएं सामने आईं। रांची में आग की घटनाएं 167 से घटकर 41 रह गईं। रांची वन्यजीव क्षेत्र में आंकड़े 4 से बढ़कर 6 दर्ज किए गए। खूंटी के जंगलों में आग की घटनाएं 178 से बढ़कर 183 हो गईं। वहीं रामगढ़ में यह आंकड़ा 222 से बढ़कर 287 पहुंच गया। सरायकेला के जंगलों में स्थिति में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। यहां आग की घटनाएं 284 से घटकर 80 रह गईं।
संताल परगना में भी जारी रही वनाग्नि
संताल परगना और उत्तर-पूर्वी झारखंड के कई इलाकों में गर्मियों के दौरान जंगलों में आग लगने की घटनाएं दर्ज की गईं। देवघर में मामले 30 से घटकर 18 रह गए। धनबाद में आग की घटनाएं 187 से घटकर 181 दर्ज की गईं। दुमका में बड़ी राहत मिली, जहां मामले 208 से घटकर सिर्फ 4 रह गए। इसके विपरीत गोड्डा में आग की घटनाएं 305 से बढ़कर 432 हो गईं। जामताड़ा में मामले 12 से घटकर 1 रह गए। पाकुड़ में आग की घटनाएं 73 से घटकर 34 रहीं। राजमहल की पहाड़ियों और साहिबगंज के जंगलों में भी आग की घटनाएं जारी रहीं। यहां आंकड़ा 271 से घटकर 259 दर्ज किया गया।
पलामू और उत्तरी छोटानागपुर में भी आग का असर
पलामू, गढ़वा, चतरा और हजारीबाग जैसे घने वन क्षेत्रों में आग से वन्यजीवों के आवास प्रभावित होने की चिंता बनी हुई है। बोकारो में आग की घटनाएं 263 से घटकर 250 दर्ज की गईं। चतरा के उत्तरी वन मंडल में आंकड़े 123 से घटकर 46 रह गए। दक्षिणी चतरा में भी आग की घटनाएं 165 से घटकर 20 दर्ज की गईं। गढ़वा उत्तर में आग की घटनाएं 90 से बढ़कर 97 हो गईं। वहीं गढ़वा दक्षिण में मामलों में कमी आई और आंकड़ा 126 से घटकर 42 रह गया।
इन वन प्रमंडलों में भी आगलगी की घटनाएं
- पूर्वी गिरिडीह: 125 से घटकर 3
- पश्चिमी गिरिडीह: 8 से घटकर 5
- हजारीबाग पूर्व: 86 से बढ़कर 132
- हजारीबाग पश्चिम: 300 से घटकर 62
- हजारीबाग वन्यजीव अभयारण्य: 248 से घटकर 128
- कोडरमा: 146 से घटकर 144
- लातेहार: 357 से बढ़कर 389
- मेदिनीनगर प्रमंडल: 277 से घटकर 13
- पीटीआर उत्तरी क्षेत्र: 117 से घटकर 103
- दक्षिणी पीटीआर: 398 से बढ़कर 501
- गुमला: 145 से घटकर 139
- लोहरदगा: 186 से बढ़कर 229
- सिमडेगा: 25 से घटकर 5
- दालमा एलिफेंट सैंक्चुअरी: 129 से घटकर 125
- जमशेदपुर वन प्रमंडल: 384 से बढ़कर 426
आंकड़ों से साफ है कि कई वन क्षेत्रों में आग की घटनाओं में कमी आई है, लेकिन कुछ इलाकों में मामलों में बढ़ोतरी भी दर्ज की गई है। खासकर दक्षिणी पीटीआर, गोड्डा, जमशेदपुर वन प्रमंडल, लातेहार और रामगढ़ जैसे क्षेत्रों के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं।




