झारखंड में आदिवासी बेटियां भी सुरक्षित नहीं, निशा भगत की मौत राज्य सरकार के माथे पर कलंक : संजय सेठ

निशा भगत की मौत सिर्फ आत्महत्या नहीं, झारखंड की ध्वस्त कानून-व्यवस्था का भयावह चेहरा मुख्यमंत्री तत्काल उच्चस्तरीय जांच कमिटी गठित करें, निशा भगत द्वारा नामजद लोगों की भूमिका की हो निष्पक्ष जांच रांची: आदिवासी समाज के हक-अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली और समाज की मुखर

सांसद संजय सेठ

अपनी भाषा में पढ़ें

निशा भगत की मौत सिर्फ आत्महत्या नहीं, झारखंड की ध्वस्त कानून-व्यवस्था का भयावह चेहरा
मुख्यमंत्री तत्काल उच्चस्तरीय जांच कमिटी गठित करें, निशा भगत द्वारा नामजद लोगों की भूमिका की हो निष्पक्ष जांच
रांची:  आदिवासी समाज के हक-अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली और समाज की मुखर आवाज रही युवा नेत्री निशा भगत की आत्महत्या की घटना अत्यंत दुखद, दुर्भाग्यपूर्ण और झारखंड की पूरी शासन-व्यवस्था को कटघरे में खड़ा करने वाली है। यह घटना राज्य की कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक संवेदनशीलता और आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री एवं रांची के सांसद संजय सेठ ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि निशा भगत ने अपने वीडियो में राज्य सरकार, शासन-प्रशासन, पिठोरिया थाना प्रभारी सहित कुछ लोगों को अपनी आत्महत्या के लिए जिम्मेवार ठहराया है। उनके द्वारा लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर हैं। इन आरोपों की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और किसी भी दोषी को बचने का अवसर न मिले।
श्री सेठ ने कहा कि झारखंड में आदिवासियों की जमीन पर अवैध कब्जे और जमीन लूट की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। प्रशासन के संरक्षण में कथित रूप से कुछ दलालों और भू-माफियाओं द्वारा आदिवासियों की जमीन हड़पने का प्रयास किया जाना बेहद चिंताजनक है। राज्य के विभिन्न थाना क्षेत्रों और अंचल कार्यालयों से जमीन संबंधी विवादों और अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही हैं। आखिर आदिवासी समाज अपनी ही जल, जंगल और जमीन के लिए कब तक संघर्ष करता रहेगा?
उन्होंने कहा कि यह विडंबना है कि आदिवासी समाज के अधिकारों की आवाज उठाने वाली एक युवा महिला को कथित प्रताड़ना और प्रशासनिक उपेक्षा के बीच ऐसी परिस्थिति का सामना करना पड़ा। यदि किसी नागरिक को न्याय की उम्मीद लेकर थाने और प्रशासन के पास जाने के बाद भी न्याय नहीं मिलता, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता है।
 संजय सेठ ने मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन से मांग की कि इस पूरे मामले में तत्काल उच्चस्तरीय जांच कमिटी गठित की जाए। निशा भगत ने अपने वीडियो में जिन घटनाओं, व्यक्तियों और प्रशासनिक अधिकारियों का उल्लेख किया है, उन सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच हो। जिन लोगों को उन्होंने अपनी आत्महत्या के लिए जिम्मेवार ठहराया है, उनकी भूमिका की तत्काल जांच कर कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई और दोषी पाए जाने पर शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि आदिवासियों की जमीन, सम्मान और अधिकारों की रक्षा केवल राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है। इस मामले में किसी भी प्रकार की लीपापोती बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। पीड़ित परिवार को न्याय मिले और भविष्य में किसी अन्य बेटी को ऐसी पीड़ा से न गुजरना पड़े, इसके लिए राज्य सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे।
WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram
संबंधित खबरें.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *