गुमला: झारखंड की सांस्कृतिक पहचान और आदिवासी परंपरा की जीवंत अभिव्यक्ति रहे मांदर की थाप को अब राष्ट्रीय स्तर पर औपचारिक पहचान मिल गई है।
गुमला जिले के रायडीह प्रखंड स्थित जरजट्टा गांव में पारंपरिक रूप से निर्मित मांदर को भारत सरकार द्वारा भौगोलिक संकेतक (जीआई) पंजीकरण प्रदान किए जाने के उपलक्ष्य में बुधवार को जरजट्टा पंचायत में विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
समारोह के दौरान उपायुक्त दिलेश्वर महतो ने मांदर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के पदाधिकारियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। साथ ही मांदर निर्माण से जुड़े कारीगरों को भी सम्मानित किया गया। चार पीढ़ियों से इस पारंपरिक कला को जीवित रखने वाले कारीगर परिवारों के लिए यह अवसर विशेष भावुक और गौरवपूर्ण रहा।
मांदर को भौगोलिक संकेतक पंजीकरण मिलना केवल गुमला की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के लिए गौरव का विषय
इस अवसर पर उपायुक्त ने कहा कि मांदर को भौगोलिक संकेतक पंजीकरण मिलना केवल गुमला की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के लिए गौरव का विषय है। मांदर हमारी सांस्कृतिक पहचान का अभिन्न हिस्सा है और इसकी थाप शादी-विवाह, पूजा-पर्व, पारंपरिक नृत्य तथा सामाजिक आयोजनों में सदियों से सुनाई देती रही है।
देश-विदेश में जब भी मांदर की चर्चा होगी, जरजट्टा गांव और यहां के कारीगरों की पहचान भी सामने आएगी
उन्होंने कहा कि अब मांदर की पहचान स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहेगी। देश-विदेश में जब भी मांदर की चर्चा होगी, जरजट्टा गांव और यहां के कारीगरों की पहचान भी सामने आएगी। जिला प्रशासन का प्रयास रहेगा कि आगे मांदर के उत्पादन, ब्रांडिंग, विपणन और बाजार उपलब्धता को मजबूत किया जाए, ताकि इसका सीधा लाभ कारीगरों की आजीविका और आय में दिखाई दे। वहीं कारीगर सम्मान पाकर काफी प्रसन्न दिखायी पड़े।
also read : झारखंड में डिजिटल हेल्थ का विस्तार, AI, Tele-ICU व Robotic Surgery से इलाज की की तैयारी




