ओल्ड-एज-होम हेसाग में डालसा का विधिक जागरूकता कार्यक्रम, बुजुर्गों को बताए अधिकार

विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस पर रांची के अपना घर ओल्ड-एज-होम में डालसा ने विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर वरिष्ठ नागरिकों को उनके अधिकार और कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी।

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रांची: विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा), रांची की ओर से ‘अकेले नहीं हैं आप’ अभियान के तहत अपना घर ओल्ड-एज-होम, हेसाग हटिया में विधिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बुजुर्गों को उनके कानूनी अधिकारों की जानकारी देने के साथ उन्हें मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक सहयोग का भरोसा दिलाना रहा। यह कार्यक्रम माननीय झारखंड उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति-सह-कार्यपालक अध्यक्ष, झालसा, श्री सुजीत नारायण प्रसाद के दिशा-निर्देश पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम को झालसा की माननीय सदस्य सचिव कुमारी रंजना अस्थाना तथा माननीय न्यायायुक्त-सह-अध्यक्ष डालसा, रांची, श्री अनिल कुमार मिश्रा का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का नेतृत्व डालसा सचिव ने किया।

इस अवसर पर डिप्टी एलएडीसी श्री राजेश कुमार सिन्हा, पीएलवी संगीता सिंह, संजय उरांव, दिपेन्द्र कुमार, अरविन्द कुमार, शिवानी तिर्की, करसेंसिया बाखला और चालक राजा वर्मा सहित अपना घर ओल्ड-एज-होम के कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में वृद्धजन उपस्थित रहे। डिप्टी एलएडीसी श्री राजेश कुमार सिन्हा ने कहा कि विधिक जागरूकता कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज के बुजुर्गों को मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि वे जीवन के इस पड़ाव को पूरे स्वाभिमान और गरिमा के साथ जी सकें। ‘अकेले नहीं हैं आप’ अभियान के माध्यम से बुजुर्गों को यह भरोसा दिलाने का प्रयास किया जा रहा है कि पूरा समाज उनके साथ खड़ा है।

उन्होंने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण, सुरक्षा और कल्याण अधिनियम, 2007 के विभिन्न प्रावधानों की भी जानकारी दी। इस दौरान वरिष्ठ नागरिकों को उनके अधिकारों और उपलब्ध कानूनी संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। श्री सिन्हा ने कार्यक्रम के उद्देश्यों और इसकी विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि युवाओं और स्वयंसेवकों को बुजुर्गों के साथ समय बिताने, उनकी कहानियां सुनने और उनके अनुभवों से सीखने के लिए प्रेरित किया जाता है। इससे वरिष्ठ नागरिकों में अकेलेपन की भावना कम होगी और उन्हें यह एहसास होगा कि समाज उनकी भावनाओं और अनुभवों का सम्मान करता है।

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